जानें संसद चलने में कैसे और कहाँ होते है करोड़ों रूपए खर्च और बर्बाद

parliament sessions running costs in details
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Parliament Sessions Running Costs In Details

इस समय मानसून सत्र चल रहा है। संसद में देश में किसानों की समस्या, बढ़ती महंगाई और कई अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। क्योंकि विपक्ष के हंगामे के चलते लगातार दूसरे दिन भी लोक और राज्य सभा की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया है। देश के सांसदों पर देश के खजाने का एक बड़ा हिस्सा खर्च किया जाता है। लेकिन इसके बाद भी कई संसद अपना काम सही से नहीं करते। वे आम जनता की सोचने की बजाये वे अपने व्यक्तिगत राजनितिक फायदे तलाशते रहते है।

एक साल में संसद (parliament) के तीन सत्र होते हैं। ये केवल 70-80 दिन (बहुत ज्यादा हुआ तो 100 दिन) चलते है। यानि 365 दिनों में 70-80 दिन ही कामकाज होता है और उसमें भी कई बार संसद स्थगित होती है और घंटों बर्बाद होते है। जिससे संसद ठीक तरह से चल नहीं पाती है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि केवल 1992 में संसद का कामकाज 80 दिनों का पूरा सही से हुआ था।

इससे सभी MPs को समझना चाहिए कि हंगामा या शोर-शराबा करके जनता की समस्या का समाधान नहीं हो सकता। पर हां समय और जनता का पैसा जरूर बर्बाद होता है। ये भी हो सकता है कि कई सांसदों को व्यक्तिगत राजनितिक फायदे मिल जाएँ। तो आईये जानते है साल में आम जनता का कितना पैसा बर्बाद होता है।

संसद का समय

हर दिन Lok Sabha में छह घंटे और Rajya Sabha में पांच घंटे का काम होता है। संसद का कामकाज सुबह 11 बजे से शुरू होता है और अमूमन 6 बजे तक चलता है। कभी-कभी ये देर रात तक चलता है। संसद की एक मिनट की कार्यवाही का खर्च लगभग 2.6 लाख रुपये, एक घंटे का 1.5 करोड़ रूपए का खर्च होता है। इस तरह 70-80 दिनों में 190 करोड़ रूपए तक खर्च होता है।

2016 में सबसे कम हुआ काम

2016 के पहले सत्र में हंगामे की वजह से 16 मिनट बर्बाद हुए जिससे 40 लाख का नुकसान हुआ। इसी तरह

समय बर्बाद इतने रूपए का नुक्सान
दूसरे सत्र में 13 घंटे 51 20 करोड़ 7 लाख
तीसरे सत्र में 3 घंटे, 28 मिनट 5 करोड़ 20 लाख
चौथे सत्र में 7 घंटे, 4 मिनट 10 करोड़ 60 लाख
पांचवें सत्र में 119 घंटे बर्बाद 178 करोड़ 50 लाख

 

RTI अर्जी पर राज्यसभा सचिवालय ने बताया कि 2014-15 से लेकर 2017-18 के बीच राज्य सभा सदस्यों को वेतन और भत्तों के रूप में कुल 4,43,36,82,937 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं लोक सभा के सदस्यों के ऊपर 2014-15 से लेकर 2017-18 के बीच प्रत्येक साल हर लोकसभा सांसद को वेतन-भत्तों के रूप में औसतन 71,29,390 रुपये का भुगतान किया गया। यानि 3,885,517,550 रूपए बीते चार वर्षों (2014 -2018) में लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों पर खर्च किए जा चुके है।

कब होते हैं संसद के सत्र?

बजट सत्र- फरवरी से मई
मानसून सत्र- जुलाई से अगस्त-सितंबर
शीतकालीन सत्र- नवंबर से दिसंबर

कहां-कैसे आता है खर्च?

• सांसदों का वेतन
• सत्र के दौरान सांसदों को मिलने वाले भत्ते
• सचिवालय के कर्मचारियों का वेतन
• सांसदों की सुविधाओं का खर्च
• संसद सचिवालय का खर्च
• सत्र के दौरान सांसदों की सुविधाओं पर खर्च के

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कितना होता है सांसदों का वेतन?

लोकसभा के 2018 के आंकड़ों की मानें तो सांसदों को हर महीने वेतन के तौर पर 50 हजार रुपए
निर्वाचन क्षेत्र भत्ते के तौर पर 45 हजार रुपए
सचिवीय सहायता के लिए 30 हजार रुपए
कार्यालय खर्च के लिए 15 हजार रुपए
इसके साथ 34 हवाई यात्रा, अनगिनत रेल और सड़क यात्रा मिलती है। इस तरह लोकसभा के हर सांसद को 1.4 लाख रुपए मिलते हैं।

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