‘यथा राजा तथा प्रजा’ सत्य है तो सिर्फ प्रजा को ही सजा क्यों?

yatha raja tatha praja
yatha raja tatha praja

देश में कोरोना से जो स्थिति बनी है उसने सभी को डरा दिया है। लगातार ऐसी ख़बरें आ रही है कि हॉस्पिटल में जगह नहीं है, शमसान घाट पर नंबर लग रहे है, संक्रमित और मृतकों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।

जिसे देखते हुए कई राज्यों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। लेकिन जहां पर कर्फ्यू होना चाहिए वहां पर सब खुला हुआ है। हम बात कर रहे है उन 5 राज्यों की जहाँ पर चुनाव हो रहे है।

राजनीतिक पार्टियां रैलियों के जरिये अपनी पूरी ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है। लेकिन ये कोशिश नहीं कर रही है कि उनकी रैली में आने वाले लोग कोरोना गाईडलाईन का पालन करें। और लोग पालन क्यों करें जब राजा ही कोरोना गाईडलाईन का उल्लंघन कर रहा हो तो प्रजा कैसे कर सकती है।

यथा राजा तथा प्रजा

आज देश की जो स्थिति है उसपर एक कहावत बिलकुल सही बैठती है और वो है ‘यथा राजा तथा प्रजा’। यानि जैसा राजा होगा वैसी ही प्रजा होगी। लेकिन यहाँ पर राजा प्रजा को कोरोना गाईडलाईन का पाठ तो पढ़ा रहे है लेकिन खुद उसका पालन नहीं कर रहे है।

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जो लोग कोरोना गाईडलाईन का पालन नहीं कर रहे है उनपर जुर्माना लगाया जा रहा है, सजा दी जा रही है। लेकिन जो नेता खुद के बनाये कानून का पालन नहीं कर रहे है उनपर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। आश्चर्य कि बात तो ये है कि इसपर सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग भी चुप्पी साधे हुए है।

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