देश में बढ़ रहे दुष्कर्म के चलते ,याद आये रंगा बिल्ला

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दिल्ली, हैदराबाद,उन्नाव जैसे जनपदों में हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले पर आज लोगो को रंगा बिल्ला याद आ रहे है। क्योकि शायद हमारा देश अब देश नहीं जंगल हो गया है। आपको बता दे की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2018 में देश की राजधानी में हर दिन 5 रेप के केस के मामले समाने आये है। उसी दिल्ली में जहां निर्भया जैसी घटना होने के बाद लोगों ने महिलाओं की सुरक्षा की कसमें खाई थीं। महिला के साथ अपराध की न तो हैदराबाद वाली घटना पहली है और न ही निर्भया हम आपको बता रहे हैं साल 1978 की घटना जिसने पूरे देश को दहला दिया जिसके दोषियों का नाम आज भी लिया जाता है।

जानिए ऐसा क्या हुआ हुआ था 1978 में

देश की राजधानी दिल्ली में 1978 में कुछ ऐसा हुआ जिसका जिक्र आज भी अगर लोग करते है तो दिल दहल जाता है। दरअसल 1978 में दिल्ली के रहने वाले नेवल अफ़सर मदन मोहन चोपड़ा की बेटी गीता और बेटा संजय चौपड़ा 26 अगस्त 1978 को घर से संसद मार्ग के लिए निकले थे। उस समय उनकी बेटी गीता की उम्र 16 साल के क़रीब थी और बेटे संजय की 14 के क़रीब थी। घर से ऑल इंडिया रेडियो के लिए निकले बच्चे वहां पहुंचे ही नहीं थे की उनको रास्ते से ही उठा लिया गया।

बच्चो का किया था अपहरण

26 अगस्त की रात मदन मोहन और उनकी पत्नी बेचैन थे। इसकी वजह थी शाम से लापता उनके बच्चे संजय और गीता चोपड़ा दोनों को शाम को ऑल इंडिया रेडियो पहुंचना था। लेकिन रात के 11 बजे तक गीता और संजय की को कोई पता नहीं चला। चोपड़ा ने थक कर अपने बच्चों की तलाश शुरू की तो पता चला कि दोनों बच्चे जहां के लिए निकले थे। वहां पहुंचे ही नहीं। घबराए मां-बाप पुलिस के पास पहुंचे।

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बच्चो की हत्या हो गई थी

29 अगस्त की सुबह एडमिरल चोपड़ा के दरवाजे पर दस्तक हुई। दरवाजे पर पुलिस थी एक बुरी खबर के साथ। पुलिस को रिंग रोड पर एक लड़के और एक लड़की की लाश मिली थी। एडमिरल चोपड़ा और उनकी पत्नी सांस रोके रिंग रोड पहुंचे। वही हुआ जो उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था। सामने था उनकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक मंजर। खून से सनी वो दो लाशें उनके मासूम बच्चों की गीता और संजय की थीं। इस सनसनीखेज वारदात ने दिल्ली शहर में सनसनी फैला दी। वारदात को सुर्खियों में ऐसी जगह मिली कि हरकत में आना पुलिस की मजबूरी बन गई।

फिरौती के लिए किया था अपहरण

रंगा और बिल्ला ने नेवी अधिकारी मदन मोहन चोपड़ा के दोनो बच्चों को गीता और संजय चोपड़ा को 26 अगस्त 1978 को फिरौती के लिए अपहरण किया था, लेकिन जब रंगा और बिल्ला को पता चला कि बच्चों के पिता नेवी के अधिकारी हैं तो दोनो बच्चों की हत्या कर दी गई। कुछ रिपोर्ट्स तो यह भी दावा करती हैं कि गीता के साथ दुष्कर्म भी किया गया था।

बेटे की हत्या कर बच्ची का रेप किया

अपहरण के 2 दिन बाद 28 अगस्त 1978 को दोनो बच्चों के शव मिले थे। मामला मीडिया में आया और दिल्ली पुलिस को तेजी से जांच बढ़ानी पड़ी तथा देशभर की पुलिस को रंगा और बिल्ला के बारे में जानकारी दे दी गई और मीडिया में भी उनके फोटो जारी हुए। 8 सितंबर 1978 को दोनो अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी गिरफ्तारी में अखबार में छपी उनकी तस्वीर ने बड़ा योगदान किया।

देश में मचा था हाहाकार

दोनो को आगरा में उस समय गिरफ्तार किया गया था। जब दोनो गलती से कालका मेल के उस डिब्बे में चढ़ गए जो सैनिकों के लिए आरक्षित था। एक सैनिक ने अखबार में छपी उनकी फोटो से उनको पहचान लिया और बाद में दोनो को गिरफ्तार कर लिया गया था।उन दोनों आरोपियों को अधिकारी की बेटी और बेटे का अपहरण और हत्या करने के मामले में पूरी जनता भड़की हुई थी और सभी रंगा बिल्ला की फाँसी की सजा की मांग कर रहे थे।

दोनों को दी गई थी फांसी 

इस दौरान जनता को लगातार प्रदर्शन जारी था।जैसे निर्भया,हैदराबाद,और उन्नाव के केस में जनता भड़की हुई है। इसी तरह उस समय भी पुरे देश में हाहाकार मचा रंगा बिल्ला को फांसी दी जाये। इसके साथ ही रंगा कुलजीत सिंह और जसबीर सिंह उर्फ बिल्ला नाम के दोनो अपराधियों को इस अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई गई और उनको 1982 में फांसी दे दी गई थी।