फ़िल्म समीक्षा “तांडव” क्यों मच रहा है तांडव ?

एक बेहतरीन स्टारकास्ट को एक बेसिरपैर की कहानी बर्बाद कर देती है। सिनेप्रेमियों के चहेते कथित सुपर-स्टार, और धाकड़ से धाकड़ एक्टर भी उन्हें अपने आकर्षण में ज़्यादा देर तक बाँधकर के नहीं रख पाते। और आजकल की युवा जनता बेहद चालाक है वो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रुकती है और डिजिटल इंजन से इंटरनेट का सफ़र करती है। सुविधा पसंद नहीं आई तो पहले कम्नेट्स में गंदी गालियाँ देंगे और फिर ट्विटर पर #हैशटैग ट्रेंड कराएंगे और फटाक से ट्रैन बदल देंगे।

तांडव के संस्कृत में कई अर्थ होते हैं। इसके प्रमुख अर्थ हैं उद्धत नृत्य करना, उग्र कर्म करना, स्वच्छन्द हस्तक्षेप करना आदि। भारतीय संगीत में चौदह प्रमुख तालभेद में वीर तथा बीभत्स रस के सम्मिश्रण से बना तांडवीय ताल का वर्णन भी मिलता है। वनस्पति शास्त्र में एक प्रकार की घास को भी तांडव कहा गया है।

कहानी

लेकिन इस पूरी सीरीज़ के किसी भाग के किसी हिस्से से इसके शीर्षक तांडव का कुछ लेना देना नहीं है। फ़िल्म के एक सीन में एक लड़का भगवान शिव बना नाटक में श्रीराम को गालियाँ दे रहा है। फिल्म में उसका नाम भी शिवा ही रखा गया है बाद में वही लड़का अपने नाटक के दम पर किसानों को उनकी जमीन वापस दिलाता है और तांडव नाम की पार्टी बनाता है। दूसरी तरफ़ इसी के परलेल एक और घटना घट रही है जिसमें एक पार्टी जो देश की सत्ता पर काबिज़ है एग्जिट पोल्स के मुताबिक़ दुबारा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आती हुई साफ़ दिखाई दे रही है।

मौजूदा प्रधानमंत्री का बेटा अतिमहत्वकांक्षी है वह स्वयं प्रधानमंत्री बनने के लिए लिए किसी भी हद तक जा सकता है। प्रधानमंत्री की एक महिला मित्र जो उसके बेटे से भी अत्यधिक महत्वकांक्षी है। और भी बहुत सारी दबी हुयी आकांक्षायें और महत्वकांक्षाएं भी हैं। किसकी महत्वकांक्षा कितनी है ? और इसे पूरा करने के लिए कौन किस हद तक जाता है ? इसे जानने के लिए आपको पूरी वेबसेरीज़ देखनी होगी ?

इस वेबसेरीज़ में JNU के सिंबल के तौर पर VNU दिखाया गया है। कई घटनाएं ऐसी दिखाई गई हैं जिनका सीधा सम्बन्ध दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्षन और पुलिस के साथ भिड़ंत के बाद उपजी हिंसा के साथ है। पूरी फिल्म में आज़ादी आज़ादी के नारे लगते हैं। ज़ीशान आयूब का क़िरदार कन्हैया कुमार से प्रेरित है। जीशान ने CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था। आज भी सरकार विरोधी उनके बयान अक्सर ट्विटर पर ट्रेंड करते हैं। ज़ीशान की इसी इमेज का फ़ायदा डायरेक्टर अली अब्बास जफ़र अपनी इस वेबसेरीज़ में भुनाया है।

अभिनय

अभिनय में सुनील ग्रोवर सब पर भारी पड़े हैं उनका हरियानवी एक्सेंट और अचानक हसना देखकर मज़ा आता है। त्रिग्मांशु धूलिआ को किरदार छोटा है मग़र निभाया उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ है। कुमुद मिश्रा, अनूप सोनी, भी अपने अपने क़िरदारों में जचें हैं। डिंपल कपाड़िया का तो ज़वाब नहीं। सैफ का क़िरदार इंटेंस है और उनके चहरे पर पूरी फ़िल्म के दौरान वह इन्टेन्सिटी दिखी है। गौहर खान साड़ी में सुंदर लग रही थी।

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