श्रीराम मंदिर आंदोलन में योगी आदित्यनाथ के योगदान पर एक नज़र…

अयोध्या नगरी में आज यानी 5 अगस्त को Shri Ram Mandir निर्माण के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ से भूमिपूजन कार्यक्रम होना है,जिसमें श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से क़रीब 175 ख़ास मेहमानों को आमंत्रित किया है।

आपको बता दें की PM मोदी के साथ मंच पर RSS प्रमुख मोहन भागवत के अलावा उत्तरप्रदेश की गवर्नर आनंदीबेन पटेल, CM योगी आदित्यनाथ और श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ही मौजूद रहेंगे।

श्रीराम मंदिर आंदोलन योगी आदित्यनाथ का योगदान…

जहां तक उत्तरप्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ का सवाल है तो वह जिस गोरक्ष पीठ के महंत हैं,उस पीठ का श्रीराम मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका रही है लेकिन इस आंदोलन के वक़्त योगी आदित्यनाथ न तो मठ में और न ही राजनीति में सक्रिय थे,इसलिए उनका उस आंदोलन में कोई योगदान नहीं रहा।

Yogi Adityanath की शुरुआती राजनीति में साक्षी और सहयोगी रहने वाले और उनके द्वारा स्थापित हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष रहे सुनील सिंह अब उनका साथ छोड़कर भले ही Samajwadi Party में शामिल हो गए हैं, लेकिन एक समय में वह योगी आदित्यनाथ के बेहद क़रीबी भी रह चुके हैं।

1998 में सांसद बने योगी आदित्यनाथ

सुनील सिंह कहना हैं कि,”श्रीराम मंदिर आंदोलन में योगी आदित्यनाथ की कोई निर्णायक भूमिका नहीं रही है। 1994 में योगी जी गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी बने और उसके बाद 1998 में सांसद बने। उस दौरान राम मंदिर को लेकर ऐसा कोई आंदोलन हुआ भी नहीं, लेकिन उससे जुड़े तमाम आंदोलनों में वो अक़्सर सक्रिय रहते थे और हम लोग भी उसमें साथ रहते थे।”

सुनील सिंह बताते हैं कि ऐसे कई मौक़े आए जब अयोध्या और राम मंदिर निर्माण को लेकर योगी आदित्यनाथ मुखर दिखे लेकिन चूंकि ये मामला अदालत में था इसलिए उसके बारे में ज़्यादा कुछ बोल नहीं सकते थे।

योगी आदित्यनाथ की गिरफ़्तारी

सुनील सिंह के मुताबिक “Ayodhya में जब परिक्रमा पर रोक लगी थी तो वहां जाने के लिए योगी जी की गिरफ़्तारी हुई थी। इसके अलावा एक बार अखंड कीर्तन में भाग लेने के लिए जा रहे थे, तब भी उन्हें ज़बरन रोका गया था।”

Lucknow में वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्र कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ की कोई भूमिका Ram Mandir आंदोलन में भले ही न रही हो, लेकिन वो जिस गोरक्षपीठ के उत्ताराधिकारी हैं, वह मठ इस आंदोलन की अगुवाई कर चुका है।

 

कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो अयोध्या विवाद की पूरी टाइम लाइन में यह बात उभर कर सामने आती है कि जब भी कोई महत्वपूर्ण घटना राम Janmbhoomi मामले में घटी है,तब उसके तार कहीं न कहीं गोरखनाथ मठ से ज़रूर जुड़े रहे हैं। इसके अलावा बात करें तो गोरखनाथ मठ की 3 पीढ़ियां श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रही हैं।

Shri Ram मंदिर आंदोलन में गोरखनाथ मठ के महंत दिग्विजयनाथ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और उनकी मृत्यु के पश्चात उनके शिष्य और उत्तराधिकारी महंत अवैद्यनाथ ने Mandir में सक्रिय भूमिका निभाई है, योगी आदित्यनाथ, महंत अवैद्यनाथ के ही शिष्य हैं।

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