सौर्य ऊर्जा से सागर का नमकीन पानी बनेगा मीठा

Sea water
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अभी तक आप लोगों ने पढ़ा होगा की सौर ऊर्जा से बिजली उत्त्पन की जा सकती है, लेकिन अब केन्या के लोगों ने इसमें एक और उपलब्धि हासिल कर ली है। theheartysoul में छपे एक लेख के अनुसार केन्या में पहला सौर संयंत्र स्थापित किया गया है। जो समुद्र के पानी को पीने के पानी में बदल देता है। इस उपलब्धि से पानी की वैश्विक कमी का समाधान हो सकता है।

जी हाँ केन्या में पहला सोलर प्लांट स्थापित किया गया है, जो महासागर के पानी को पीने के पानी में बदल देगा। पृथ्वी पर जमीन से ज्यादा पानी  है। वास्तव में, हमारे ग्रह पृथ्वी का 71 प्रतिशत भाग पानी में समाया हुआ है। इसके बावजूद, दुनिया में नौ लोगों में से एक के पास शुद्ध पेयजल नहीं पहुँच पाता है। ऐसे लोग पूरी दुनिया में लगभग 785 मिलियन हैं।

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पृथ्वी के 71 प्रतिशत भाग पर पानी  होने की बावजूद शुद्ध पेयजल की कमी है। ऐसा इसलिए है क्यूंकि पृथ्वी का 96.5 प्रतिशत पानी खारे पानी के रूप में महासागरों में पाया जाता है और मनुष्यों के लिए पीने योग्य नहीं है। मीठे पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए हमें नदियों, झीलों और भूजल पर निर्भर रहना पड़ता है।

विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, वैश्विक जल संकट का समाज में प्रभाव के मामले में नंबर चार पर है एक एनजीओ (गैर-सरकारी संगठन) इसे बदलने की लगातार कोशिश कर रहा है। उसका मिशन सौर ऊर्जा तकनीकों को स्थापित करना है। जिससे विकासशील समुदायों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जा सके।

एनजीओ ने एक ब्रेक-थ्रू परियोजना केन्या के एक गांव किंगा में शुरू की है, जो सौर-संचालित है। यह सौर परियोजना अलवणीकरण प्रणाली पर आधरित है। जिससे गांव के लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इस तकनीक के साथ महासागर के नमकीन पानी को पिने योग्य बनाया जायेगा और  गांव में रहने वाले लोगों के लिए पीने के पानी का एक व्यावहारिक स्रोत अब होगा। यह प्रणाली हर दिन लगभग 70 हजार लीटर पीने योग्य पानी का उत्पादन करने में सक्षम है, जो 35 हजार लोगों के लिए पर्याप्त है।