शिवपाल सिंह यादव के बिना यूपी चुनाव में जीत मुश्किल : प्रासपा

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चुनाव के रण में हर कोई अपना दाव खेल रहा है इसी बीच कौन, किसको और कितनी कड़ी टक्कर देगा यह देखना होगा। भाजपा की सत्ता तो उत्तर प्रदेश में है, अब उसके खिलाफ बाकि पार्टियां लड़ रही है। ऐसे में प्रासपा और सपा मिल के काम करने वाली थी लेकिन अब ये नहीं होने वाला है।

ऐसे में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक मिश्रा का यह कहना है कि शिवपाल सिंह यादव के बिना उत्तर प्रदेश में गठबंधन में धार नहीं आएगी क्योकि 2017 और 2019 के चुनाव की बात करे तो बिना शिवपाल यादव के हुए गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा।

इसके अलावा सभी ने देखा है की लड़ने की बात तो दूर भारतीय जनता पार्टी के सामने ठीक से खड़े भी नहीं हो पाऐ थे। शिवपाल सिंह यादव गठबंधन की रीढ़ है और जब तक रीड़ की हड्डी मजबूत नहीं होगी तब तक गठबंधन मजबूत नहीं होगा।

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यही कारण है की इस चुनाव में सभी क्षेत्रीय दल लगातार शिवपाल यादव के संपर्क में है की बिना शिवपाल यादव के गठबंधन में धार नहीं आ पायेगी। अगर मौजूदा सरकार को हराना है तो विपक्ष के गठबंधन को एक साथ आकर मजबूती से 2022 का चुनाव लड़ना होगा।

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