National Education Day: मौलाना अबुल कलाम ने की थी महिलाओं की शिक्षा की पुरजोर वकालत

National Education Day 2020
National Education Day 2020

भारत के पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री- Maulana Abul Kalam Azad की जयंती पर हर साल 11 नवंबर को भारत National Education Day मनाता है। एक स्वतंत्रता सेनानी, विद्वान और प्रख्यात शिक्षाविद, मौलाना आज़ाद स्वतंत्र भारत के एक प्रमुख वास्तुकार थे| वह AICTE और UGC जैसे शीर्ष शिक्षा की स्थापना के लिए जिम्मेदार थे। Abul Kalam Ghulam Muhiyuddin ने 1947 से 1958 तक स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय जो अब शिक्षा मंत्रालय हैं ने 11 सितंबर, 2008 को घोषणा की, “मंत्रालय ने भारत में शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए भारत के इस महान बेटे के जन्मदिन को मनाने का फैसला किया है।” इसी तरह 11 सितंबर, 2008 को एक संकल्प के साथ, केंद्र सरकार ने 11 नवंबर को National Education Day के रूप में घोषित किया था| पहले राष्ट्रीय शिक्षा दिवस समारोह का उद्घाटन 11 नवंबर, 2008 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा किया गया था।

1888 में मक्का, सऊदी अरब में जन्मे, आजाद के परिवार ने उन्हें एक बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए कलकत्ता स्थानांतरित कर दिया था। उनकी गुणवत्ता की शिक्षा एक पत्रकार और एक कवि के रूप में उनके काम को दर्शाती है। 1912 में, आज़ाद ने ब्रिटिश नीतियों की आलोचना करने के लिए अल-हिलाल नामक एक साप्ताहिक प्रकाशन शुरू किया था। जिस पर प्रतिबंध लगने के बाद, उन्होंने एक और साप्ताहिक अल-बगहा शुरू किया, जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने 1916 में रक्षा नियमों के तहत उन पर प्रतिबंध लगा दिया था।

आज़ाद ने महिलाओं के लिए की थी वकालत

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने महिलाओं की शिक्षा की पुरजोर वकालत की। 1949 में, सेंट्रल असेंबली में, उन्होंने आधुनिक विज्ञान और ज्ञान में शिक्षा प्रदान करने के महत्व पर जोर दिया। आजाद ने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय शिक्षा का कोई भी कार्यक्रम उचित नहीं हो सकता है, यदि यह समाज की आधी आबादी की शिक्षा और उन्नति की तरफ ध्यान नहीं देता हैं जो यही महिलाएं हैं|

मौलाना आज़ाद अरबी, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी और बंगाली जैसी भाषाओं के अच्छे जानकार थे। आज़ाद के नाम से लोकप्रिय, उन्हें एक प्रसिद्ध विद्वान, कवि और क्रांतिकारी पत्रकार होने के लिए और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान के लिए भी याद किया जाता है। मौलाना आज़ाद ने भारत के शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई हैं। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के बाद साक्षरता दर में सुधार किया जब पूरा देश व्यापक रूप से अशिक्षा से पीड़ित था।

National Education Day पर मौलाना अबुल कलाम के कुछ प्रेरणादायक उद्धरण:

“हमें एक पल के लिए नहीं भूलना चाहिए, कम से कम बुनियादी शिक्षा प्राप्त करना प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है, जिसके बिना वह एक नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी तरह से निर्वहन नहीं कर सकता है।”

“शिक्षाविदों को छात्रों के बीच जांच, रचनात्मकता, उद्यमशीलता और नैतिक नेतृत्व की भावना की क्षमता का निर्माण करना चाहिए और उनका आदर्श बनना चाहिए।”

“राष्ट्रीय शिक्षा का कोई भी कार्यक्रम उचित नहीं हो सकता है, अगर यह समाज की आधी आबादी यानी महिलाओं की शिक्षा और उन्नति पर पूरा ध्यान न दे।”

“कला भावनाओं की शिक्षा है और इस प्रकार वास्तव में राष्ट्रीय शिक्षा की किसी भी योजना में एक अनिवार्य तत्व है। शिक्षा, चाहे वह माध्यमिक में हो या विश्वविद्यालय के स्तर पर, उसे पूर्ण नहीं माना जा सकता है यदि वह हमारे संकायों को सौंदर्य की अनुभूति का प्रशिक्षण नहीं देती है।”

“अपने मिशन में सफल होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकनिष्ठ मन रखना चाहिए।”

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