अयोध्या विवाद का सच इतिहास के पन्नो से

ayodhya dispute history
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अयोध्या विवादित भूमि पर 15 नवंबर से 17 नवंबर के बीच सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकता है, जिसके चलते उत्तर प्रदेश सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये हैं। सुरक्षा में कोई भी चूक न हो इसके लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। अयोध्या समेत कई जिलों में धरा 144 लागू कर दी गयी है। सरकार सोशल मीडिया पर कड़ी नज़र रखे हुए है। लोगो से किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान ना देने को कहा गया है।

आइए जानतें अयोध्या विवाद का इतिहास

  • लोगों का मानना है की 1528 में बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण करवाया। स्थानीय लोगों की
    माने तो बाबर के सेनापति मीर बाकी ने यह मस्जिद बनवाई। यह वो दौर था जब मुग़ल सल्तनत का विस्तार होना शुरू हुआ था।
  • सबसे पहले जो लिखित जानकारी मिलती है वो 1853 की है। जब निर्मोही अखाड़े ने ढाँचे पर मंदिर होने का दवा पेश किया। अखाड़े के इस दावे के बाद से लगातार हिंसा भड़कती रही। तब यह क्षेत्र अवध नाम से जाना जाता था।
  • 1859 में अंग्रेजों ने मस्जिद के सामने दीवार बना दी। जिसके अंदर के हिस्से को मुस्लिमों को नमाज के लिए तथा बाहरी हिस्से को हिन्दुओं को पूजा के लिए दे दिया गया।
  • 1885 में महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में बाबरी मस्जिद परिसर में राम मंदिर बनाए जाने की अपील की। अदालत ने ये अपील ठुकरा दी और मामला कुछ दिनों के लिए ठंडा हो गया।
  • लेकिन 1933-34 में देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे हुए और एक बार फिर अयोध्या में मंदिर मस्जिद विवाद को हवा मिली, मस्जिद के गुंम्बद तथा दीवारों को नुकसान पहुंचा जिसे अंग्रेज़ो ने सही करवाया|
  • यह वो दौर था जब देश में आजादी की लहर जोरों पर थी और लोग आपसी रंजिस को भूल देश की आजादी में लगे थे इस वजह से कुछ सालों के लिए इस मुद्दे को भुला दिया गया।
  • आजादी मिलते ही देश में बटवारा हुआ और हिन्दुस्तान और पकिस्तान का जिंन्न लोगों के दिमाग में बैठ गया और देश में सांप्रदायिक दंगे हुए शुरू हो गए। जिससे एक बार फिर 1949 में बाबरी विवाद नई तूल पकड़ा। पर इस बार सरकार ने विवादित स्थल पर ताला लगा दिया।
  • 1960 में उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड तथा निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल के हस्तांतरण के लिए मुकदमा दायर किया।
  • 1986 में सरकार ने ताला खोलने तथा हिन्दू पक्ष को पूजा करने की इजाजत दे दी। मुसलमानों ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति बनायीं और इस मुद्दे ने फिर से तूल पकड़ा।
  • अब तक इस ने मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया था। और सभी पार्टियां इस अवसर को भुनाने का सपना देखने लगीं थीं।
  • 1990 में आडवाणी ने रथ यात्रा शुरू की और भरी संख्या में कार सेवक अयोध्या पहुँचने लगे। इस दौरान देश की विभिन्न हिस्सों में साम्प्रदयिक दंगे हुए जिसके चलते इस मुद्दे नई भयावह रूप ले लिया।
  • 6 दिसंबर 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस का दिन।
  • हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दिया। अस्थाई राम मंदिर बना, देश में चारों ओर सांप्रदायिक दंगे होने लगे और हजारों लोगों की जाने गयी।