मुर्ख  नयनार  संत , थे  थर्टी -सेकंड  नयनस . किंग  ऑफ़  गैंबलिंग

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मुर्ख नयनार को मूरका नयनार, मुर्गगा नयनार और मुर्खर के नाम से भी जाना जाता है. यह एक हिन्दू संत थे जिन्हें अपना जीवन शैववाद के हिन्दू संप्रदाय को समर्पित किया। इन्हें ६३ नयनार की सूचि में ३२ स्थान दिया जाता है। मुर्ख का जन्म थिरुवरकाडु में हुआ था. वह एक वेल्लालर  थे, जो की कृषि मालिकों की  एक  जाती है। इन्हें भगवान् शिव के महान भक्तो के रूप में गिना जाता है। इन जैसे ६२ और नयनार भी थे जिन्होंने अपना जीवन शिव भक्ति में वयतीत कर दिया। 

मुर्ख नयनार बचपन से ही शिव की प्रति भक्ति रखते थे। वह शिव के भक्त शैवों की सेवा करते थे। वह उनके लिए भिन भीन प्रकार के व्यंजन जैसे घी चावल, मिठाई आदि बनते थे। मुर्ख ने अपना सारा धन व् सम्पति शिव भक्तो को भोजन खिलने में खर्च कर दी। सब बेचने के बाद जब उनके पास धन की कमी हुई तोह उन्होंने जुए की तरफ रुख कर लिया। उन्हों इस कला में महारत हासिल करके शिव के भक्तो की सेवा में सारा जीती हुई राषि खर्च कर दी।

इससे ये ज्ञात होता है की जुआ कितने समय से हिंदुस्तान में प्रचलित है। पहले ज़माने में सिर्फ कुछ एक खेल ही थे जिनको लोग खेला करते थे किन्तु अब और भी बहुत से खेल है जो लोग आज के ज़माने में खलते है। तकनीकी उन्नति के कारण अब ये सब खेल लोग घर में अपने मोबाइल पर खेल सकते है। अगर आप भी उनमें से है जिन्हें ऑनलाइन खेल जैसे की कैसिनो में दिलचस्पी है तो इस लिंक पर onlinecasinoexperts.in पर क्लिक करके और जानकारी प्राप्त करे। चलिए अब आगे आगे देखते है की कैसे मुर्ख नारायण अपने बुद्धि का प्रयोग करके इन खेलो में जीत हासिल करते थे।

मुर्ख नारायण की तीव्र बुद्धि 

मुर्ख नारायण शिव की भक्तो की सेवा के लिए इतनी प्रबल इच्छा रखते थे की उन्होंने धन कमाने के लिए  पूरी दक्षिण भारत के जुआ घरो की यात्रा की। ६३ नयनार की जीवनी पर लिखी पेरिया पुराणम में भी इस चीज़ का वर्णन किया गया है। उसमें मुर्ख नारायण की रणनीतियो के बारे में भी बात की गयी है और पढ़ें rajasthangyan.com

क्योंकि मकरः एक यात्री थे तो जब भी वह किसी नए जुआ घर में जाते वह उनको कोई पहचानता की था। वह इसी बात का फायदा उठाते थे और शुरुआत में हार जाते थे।

जोश में आकर उनके विरोधी बड़ी रकम की सकते बाज़ी करते थे। बस फिर मुर्ख अपनी बुद्धि का प्रयोग करके हारी हुई बाज़ी जीत लेते थे और एक ही बार में बड़ी राशि कमा लेते थे।

निष्कर्ष

मुर्ख नारायण एक ऐसी शख्सियत थी जिनको आज भी तमिल नाडु  में बहुत ही इज़्ज़त और सम्मान के साथ याद किया जाता है। उनके की गयी सेवा आज भी दक्षिण भारत के लोग नहीं भूले। उनके किये गए उच्च कार्य आज भी लोग याद करते है।

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