यूपी के मोस्टवांटेड विकास दुबे का काला चिटठा आया सामने….

Most Wanted Vikas Dubey

यूपी के बिकरु गाँव से शुरू हुआ खूनी आतंक आज खूंखार विकास दुबे के नाम से इतना चर्चित हो चुका है कि सिर्फ उत्तर प्रदेश की नजर ही नही बल्कि पूरे देश की अटकलें विकास के नाम पर टिकी हुईं हैं, यहां तक कि अपराध की दुनिया के बेताज बादशाह भी विकास दुबे के नाम के आगे झुक सा चुका है।

ऐसे खूंखार विकास की कहानी शुरू हुई थी सन 1990 के दशक से जब उसने पहली हत्या करके क्राइम की दुनिया मे पहला कदम रखा था और फिर 2001 में तत्कालीन भाजपा सरकार के दर्जा प्राप्त श्रम राजमंत्री संतोष शुक्ला हत्या कांड को शिवली थाने में अंजाम देकर बड़ा नाम कमाने वाले विकास दुबे ने एक बार फिर आतंक का बड़ा सबूत पेश कर दिया, जिसमे बीते गुरुवार की रात को आठ पुलिस कर्मचारियों की हत्या करके पूरे प्रदेश को चुनौती दे डाली है,आइये देखते है इस खूंखार विकास दुबे की आपराधिक दुनिया का वह सफर जिसने यूपी को चुनौती दे रखी है।

कानपुर के बिकरु गांव में गुरुवार रात विकास दुबे और उसके साथियों ने सीओ समेत 8 पुलिसवालों की गोली मारकर हत्या कर दी थी,,, दिल दहलाने वाली इस सबसे वारदात के 60 घंटे से अधिक समय बीत चुका है लेकिन इसका मास्टर माइंड विकास दुबे अभी भी पुलिस पकड़ से दूर बना हुआ है। जबकि यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से लेकर प्रदेश के डीजीपी हितेश चंद्र ने विकास दुबे की गिरफ्तारी को लेकर जिंदा या मुर्दाबाद का फैसला लिया है और कहा है कि विकास खात्मे के बाद ही सभी टीमें अपने गंतव्य को लौटेगीं लेकिन अब तक विकास का सुराग तक नही लगा है।

विकास के आतंक को लेकर पुलिस ने अब तक कि गयी कार्रवाई के चलते विकास के उस घर का निस्ताबूत कर दिया है जहां आठ पुलिस वालों को मौत के घाट उतार दिया था। वही वारदात की अगली सुबह विकास की तलाश में लगीं पुलिस टीम ने विकास के मामा और भतीजे को मार गिराया था और आज की बीती रात यानी शनिवार की रात पुलिस ने विकास के साथ पुलिस हमले में शामिल दया शंकर अग्निहोत्री को भी मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया है।

आपको बताते चलेंकि विकास दुबे को पकड़ने के लिए एसटीएफ की 8 टीम समेत पुलिस की 100 टीम लगाई गई हैं,,, इसके साथ ही पुलिस वालों की हत्या करने वाले विकास दुबे पर एक लाख रुपये इनाम कर दिया है साथ ही 18 साथियों पर भी 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया है,,, वहीं विकास पर दबाव बनाने के लिए पुलिस ने उसके बैंक खाते और संपत्ति की जांच शुरू कर दी है। बिकरु गांव के स्थानीय लोगों की मानें तो विकास के नाम पर कोई संपत्ति नहीं है,,, उसने परिजन समेत रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति बनाई है।

अब जरा उस आतंक को भी देख लीजिए जिसको अंजाम देकर विकास दुबे आतंक का पर्याय बना था,,, जिसकी शुरुआत हुई थी 12 अक्टूबर 2001 की सुबह 11 बजे से जब शिवली थाना क्षेत्र में रहने वाले लल्लन बाजपेई के पक्ष में आये श्रम राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की थाने के अंदर हत्या कर दी थी लेकिन अपने रुतबे और नेताओं के संबंधों के चलते विकास के खिलाफ किसी ने कोई गवाही नही दी थी। जिसके कारण साल 2006 में सबूतों के अभाव को मद्देनजर कोर्ट ने विकास को बरी कर दिया था। जिसका दर्द आज भी संतोष शुक्ला के भाई मनोज शुक्ला बयां करते हैं,,, मनोज कहते हैं कि उन्हें एक बार फिर उम्मीद है कि विकास के खात्मे से उनको मानसिक राहत जरूर मिलेगी लेकिन उनका यह भरोसा अभी भी अधूरा है।

फिलहाल विकास के खात्मे की कसम खा चुकी यूपी की योगी सरकार और पुलिस विभाग पूरी कोशिशों में लगा हुआ है।यूपी का बॉर्डर सील, नेपाल के रास्ते पर चौकसी बढ़ाई विकास दुबे का 60 घण्टे घंटे बाद भी कोई सुराग नहीं मिल रहा है। अब तक लखनऊ, कन्नौज, सोनभद्र, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, सहारनपुर और बांदा में छापे मार गए हैं। यूपी के सभी बॉर्डर सील कर दिए गए एसटीएफ को नेपाल बॉर्डर तक अलर्ट किया गया है।
लेकिन इंतजार कब तक….

रिपोर्ट:-दिवाकर श्रीवास्तवा…

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