कृष्ण जी की आरती – Arti Sri Krishn Ji Ki

Sri Krishna

भगवन श्री कृष्ण को श्री विष्णु भगवान का अवतार माना जाता है। जिनका जन्म आज (2019) से 5131 वर्ष पूर्व द्वापर युग में हुआ था। समय के साथ साथ श्री कृष्ण भगवान को मानने वालों की संख्या बढ़ती गयी। आज देश के साथ-साथ विदेशो में भी अन्य धर्म के लोग श्री कृष्ण को मानते और पूजते है। पूजा में भक्त भगवान को प्रसन्न करने के लिए भजन-कीर्तन आदि करते है और अंत में आरती करके अपनी पूजा को समाप्त करते है। क्योंकि आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है और भगवान की कृपा प्राप्त नहीं हो पाती। तो आईये श्री कृष्ण जी की आरती करते है और उनकी कृपा प्राप्त करते है।

आरती कुंजबिहारी की।
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की।
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला।
बजावै मुरली मधुर बाला ।।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।।
गगन सम अंग कांति काली।
राधिका चमक रही आली ।।
लतन में ठाढ़े बनमाली।

भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक।

ललित छवि श्यामा प्यारी की…।

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
आरती कुंजबिहारी की…॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै ।
देवता दरसन को तरसैं ।।
गगन सों सुमन रासि बरसै।

बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग।।

अतुल रति गोप कुमारी की।

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की…।

जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा

Hanuman ji ki arti – आरती हनुमान जी की

बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच।

चरन छवि श्रीबनवारी की,

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ।
आरती कुंजबिहारी की…।।

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू

हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।

टेर सुन दीन दुखारी की।

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की…।

आरती कुंजबिहारी की।
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की।
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥