जानें शंख का वैज्ञानिक एवं ज्योतिष महत्व और कैसे होता है इससे स्वास्थ्य लाभ

shankh facts and benefits
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Shankh Facts and Benefits: हिन्दू धर्म में शंख का बहुत महत्व है। शंख का वर्णन सभी पुराणों और ग्रंथों में किया गया है। शंख धर्म और स्वास्थ्य दोनों में अपना महत्व रखता है। भारतीय धर्म शास्त्रों में शंख का स्थान विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण है। शंख का अर्थ है संकल्प, सुनिश्चय का प्रकटीकरण। पूजा अर्चना तथा अन्य मांगलिक कार्यों पर शंख ध्वनि की विशेष महत्ता है। आज हम आपको शंख के बारे में ये बातें बताएँगे।

1. कैसे हुई शंख की उत्पत्ति
2. पूजा में शंख का उपयोग
3. शंख बजाने से होने वाले 20 लाभ
4. शंख बजाने से स्वास्थ्य पर क्या होता है प्रभाव
5. शंख बजाने का वैज्ञानिक, धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व

वैज्ञानिक महत्व

1– शंख की आकृति और पृथ्वी की संरचना समान है नासा के अनुसार – शंख बजाने से खगोलीये ऊर्जा का उत्सर्जन होता है जो जीवाणु का नाश कर लोगो को ऊर्जा व् शक्ति का संचार करता है।

2– शंख में १००% कैल्शियम है इसमें रात को पानी भर के पीने से कैल्शियम की पूर्ति होती है।

3– शंख बजाने से योग की तीन क्रियाएँ एक साथ होती है – कुम्भक, रेचक, प्राणायाम।

4– शंख बजाने से हृदयाघात, रक्तचाप की अनियमितता, दमा, मंदाग्नि में लाभ होता है।

5– शंख बजाने से फेफड़े पुष्ट होते है।

6– शंख में पानी रख कर पीने से मनोरोगी को लाभ होता है उत्तेजना काम होती है।

7– शंख की ध्वनि से दिमाग व् स्नायु तंत्र सक्रिय रहता है।

धार्मिक महत्व 

8– दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मी स्वरुप कहा जाता है इसके बिना लक्ष्मी जी की आराधना पूरी नहीं मानी जाती।

9– समुन्द्र मंथन के दौरान १४ रत्नो में से ये एक रत्न है सुख- सौभाग्य की वृद्धि के लिए इसे अपने घर में स्थापित करे।

10– शंख में दूध भर कर रुद्राभिषेक करने से समस्त पापो का नाश होता है।

11– घर में शंख बजाने से नकारात्मक ऊर्जा का व् अतृप्त आत्माओ का वास नहीं होता।

12– दक्षिणावर्ती शंख से पितरो का तर्पण करने से पितरो की शांति होती है।

13– शंख से स्फटिक के श्री यन्त्र अभिषेक करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

ज्योतिषीय महत्व

14– सोमवार को शंख में दूध भर कर शिव जी को चढाने से चन्द्रमा ठीक होता है।

15– मंगलवार को शंख बजा कर सुन्दर काण्ड पढ़ने से मंगल का कुप्रभाव कम होता है।

17– शंख में चावल भर के रखे और लाल कपडे में लपेट कर तिजोरी में रखे, माँ अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है।

18– बुधवार को शालिग्राम जी का शंख में जल व तुलसी जी डाल कर अभिषेक करने से बुध ग्रह ठीक होता है।

19– शंख को केसर से तिलक कर पूजा करने से भगवन विष्णु व् गुरु की प्रसन्ता मिलती है।

20– शंख सफ़ेद कपड़े में रखने से शुक्र ग्रह बलि होता है।

21– शंख में जलभर कर सूर्यदेव को अर्घ्य देने से सूर्य देव प्रसन्न होते है।

22– शंख की पूजा करने से ऐश्वर्य प्राप्त होता है।

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एक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने शंखासुर नामक एक दैत्य का वध किया था, उसी शंखासुर के मस्तक तथा कनपटी की हड्डी का प्रतीक है शंख। धार्मिक मान्यता जो भी हो, परंतु वैज्ञानिक दृष्टि कोण से कहें तो शंख सागर का एक जलचर है जो कि ज्यादातर वामावर्त या दक्षिणावर्त आकार में बना होता है। शास्त्रों में विभिन्न स्थानों पर शंख को समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से एक माना जाता है।

महत्व व उपयोग: शंख को निधि का प्रतीक माना जाता है। इसे घर में पूजा स्थल पर रखने से अनिष्टों का शमन व सौभाग्य में वृद्धि होती है। आइये जानते है इसके गुणों के बारे में।
धर्म और स्वास्थ्य में शंख का महत्व

1. अगर वाणी में है दोष – यदि कोई बोलने में असमर्थ या किसी भी प्रकार का कोई वाणी दोष है तो शंख बजाने से लाभ मिलता है। शंख बजाने से कई तरह के फेफेड़े के रोग जैसे दमा, संक्रमण, क्षय, दिल की बीमारी, पेट की बीमारी और आस्थमा आदि रोगों से निजात मिलती है। शंख बजाने से पूरे शरीर में वायु का प्रवाह अच्छे तरीके से होता है, जिससे हमारा शरीर निरोगी हो जाता है।

2. गर्भवती महिला को मिलता है लाभ – शंख के जल से शालिग्राम को स्नान करायें और उसके बाद उस जल को गर्भवती महिला को पिला देने से होने वाला बच्चा स्वस्थ्य रूप से पैदा होता है।

3. अगर नहीं हो रही है सन्तान – जिन महिलाओं को सन्तान न होने की समस्या है, उन्हे यदि नियमित रूप से दो क्षिणावर्ती शंख में जल डालकर पिलाया जाये तो सन्तान प्राप्त हो सकती है।

4. दूर करता है नकारात्मक ऊर्जा – ब्रहमवैवर्तपुराण के अनुसार शंख में जल भरकर रखने के कुछ समय पश्चात उसी जल से पूजन सामग्री धोयें एंव बचे हुये जल को पूरे घर में छिड़कने से घर का वातारण शुद्ध हो जाता है जिससे किसी भी प्रकार की नकारात्मक उर्जा भवन में टिक नहीं पाती है।

5. प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ – शंख से शिव जी का अभिषेक करने पर भोले बाबा अत्यन्त प्रसन्न हो जाते है।

6. घर में आता है धन – दक्षिणावर्ती शंख को पूजा कक्ष में रखकर उसका विधिवत पूजन करने से घर की आर्थिक स्थिति बनी रहती है एंव परिवार में आपसी प्रेम का अच्छा वातावरण बना रहता है।

7. मर जाते हैं जीवाणु – शंख की ध्वनि में एक खास बात होती है कि इससे निकलने वाली ध्वनि से 200 मीटर के अन्दर वातावरण में रहने वाले ऐसे जीवाणु मर जाते है, जो अन्य किसी भी तरीके से नहीं मरते है।

8. शंख की पूजा के लिये मंत्र – शंख की पूजा इस मन्त्र से करनी चाहिए : त्वंपुरा सागरोत्पन्न विष्णुनाविघृतःकरे देवैश्चपूजितः सर्वथौपाच्चजन्यमनोस्तुते।

9. रोग, दुख व दारिद्र्य होती है दूर – दीपावली, होली, नवरात्रि, राम नवमी, गुरु पुष्य योग या शुक्रवार को शुभ मुहूर्त में लाल रंग के वस्त्र पर विशिष्ट कर्मकांड विधि से शंख की स्थापना कर धूप, दीप, नैवेद्य से इसका पूजन नित्य करना चाहिए। ऐसा करने से सभी प्रकार के असाध्य रोग, दुख व दारिद्र्य दूर होते हैं।

10. अनुकूल वास्तु के लिए शंख स्थापना – घर के ईशान कोण में आसन पर शंख की स्थापना इस तरह करनी चाहिए कि उसका धारा मुख उत्तर की ओर हो। इससे सुख-संपदा और परिवार के सदस्यों में परस्पर प्रेम की अभिवृद्धि होती है और उनका स्वास्थ्य अनुकूल रहता है।

11. शंख की आकृति और पृथ्वी की संरचना समान है। नासा के अनुसार शंख बजाने से खगोलीय उर्जा का उत्सर्जन होता है। जो जीवाणु का नाश कर लोगों में उर्जा व शक्ति का संचार करता है।

12. शंख कैल्शियम से निर्मित होता है। इसमें रात को पानी भर के पीने से कैल्शियम की पूर्ति होती है।

13. शंख बजाने से योग की 3 क्रियाएं एक साथ होती है। कुम्भक, रोचक, प्राणायाम। शंख बजाने से हदयाघात, रक्तचाप की अनियमितता, दमा, मदागिन मे लाभ होता है। शंख बजाने से फेफडे पृष्ट होते हैं।

14. शंख मे पानी रखकर पीने से मनोरोगी को लाभ होता है। उत्तेजना कम होती है। शंख की ध्वनि से दिमाग व स्नायु तंत्र सक्रिय रहती है।

15. दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मीस्वरूप कहा जाता है। इसके बिना लक्ष्मीजी की आराधना पूरी नही मानी जाती हैै। घर मे शंख बजाने से नकारात्मक उर्जा व अतृप्त आत्माएं निकल जाती है। शंख मे चावल भरकर रखें और लाल कपड़ें मे लपेटकर तिजोरी मे रखें अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है।

16. शंख को दुकान, मकान, आॅफिस, फैक्ट्री आदि में स्थापित करने से वहां के वास्तु दोष दूर होते हैं तथा लक्ष्मी का वास व व्यवसाय में उन्नति होती है।

17. पूजा स्थान में दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना करने से चिरस्थायी लक्ष्मी का वास होता है।

18. कामनापूर्ति हेतु शंख की नर और मादा की जोड़ी की स्थापना करनी चाहिए। कहा जाता है कि गणेश शंख में जल भरकर प्रतिदिन गर्भवती स्त्री को सेवन कराने से संतान स्वस्थ व रोग मुक्त होती है।

19. कछुआ शंख की स्थापना से अन्न, धन, लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार मोती शंख को घर में रखने व उसकी पूजा करने से आध्यात्मिक उन्नति और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है तथा स्वास्थ्य अनुकूल रहता है।

20. वैज्ञानिकों के अनुसार शंख नाद करने से वायु शुद्ध होती है तथा नकारात्मक ऊर्जा का नाश और सकारात्मक ऊर्जा का सृजन होता है। इसकी ध्वनि के प्रसार क्षेत्र तक सभी कीटाणुओं का नाश हो जाता है।

21. हृदय और दमा के रोगियों के लिए शंख नाद करना लाभदायक होता है। शंख नाद करने से गले से संबंधित बीमारियों से भी मुक्ति मिलती है।

22. आयुर्वेद के अनुसार शंखोदक भस्म के सेवन से पेट से संबंधित बीमारियां दूर होती हैं और रक्त शुद्ध होता है।

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कैसे हुई शंख की उतपत्ति 

1. शंख की उत्पत्ति संबंधी पुराणों में एक कथा वर्णित है। सुदामा नामक एक कृष्ण भक्त पार्षद राधा के शाप से शंखचूड़ दानवराज होकर दक्ष के वंश में जन्मा। श्री विष्णु जी ने इस दानव का वध किया। शंखचूड़ के वध के पश्चात्‌ सागर में बिखरी उसकी अस्थियों से शंख का जन्म हुआ और उसकी आत्मा राधा के शाप से मुक्त होकर गोलोक वृंदावन में श्रीकृष्ण के पास चली गई। हिन्दू धर्मशास्त्रों में शंख का विशिष्ट एवं महत्त्वपूर्ण स्थान है। मान्यता है कि इसका प्रादुर्भाव समुद्र-मंथन से हुआ था। समुद्र-मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से छठवां रत्न शंख था।

2. रत्नों की भांति शंख में भी वही अद्भुत गुण मौजूद थे। विष्णु पुराण के अनुसार माता लक्ष्मी समुद्रराज की पुत्री हैं तथा शंख उनका सहोदर भाई है। अत यह भी मान्यता है कि जहाँ शंख है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है। इन्हीं कारणों से शंख की पूजा भक्तों को सभी सुख देने वाली है। शंख की उत्पत्ति के संबंध में हमारे धर्म ग्रंथ कहते हैं कि सृष्टी आत्मा से, आत्मा आकाश से, आकाश वायु से, वायु आग से, आग जल से और जल पृथ्वी से उत्पन्न हुआ है और इन सभी तत्व से मिलकर शंख की उत्पत्ति मानी जाती है।

3. भागवत पुराण के अनुसार, संदीपन ऋषि आश्रम में श्रीकृष्ण ने शिक्षा पूर्ण होने पर उनसे गुरु दक्षिणा लेने का आग्रह किया। तब ऋषि ने उनसे कहा कि समुद्र में डूबे मेरे पुत्र को ले आओ। कृष्ण ने समुद्र तट पर शंखासुर को मार गिराया। उसका खोल शेष रह गया। माना जाता है कि उसी से शंख की उत्पत्ति हुई। पांचजन्य शंख वही था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शंखासुर नामक असुर को मारने के लिए श्री विष्णु ने मत्स्यावतार धारण किया था। शंखासुर के मस्तक तथा कनपटी की हड्डी का प्रतीक ही शंख है। उससे निकला स्वर सत की विजय का प्रतिनिधित्व करता है।

पं शान्तनु अग्निहोत्री
ज्योतिष एवं वास्तु विचारक

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