रघुराज प्रताप सिंह से राजा भैया बनने तक का सफर

राजा भैया जिनका वास्तविक नाम रघुराज प्रताप सिंह है। इनका जन्म 31 अक्टूबर 1967 को श्रीमती मंजुल राजे और पिता उदय प्रताप सिंह के यहाँ प्रतापगढ़ में हुआ था। राजा भैया के दादा बजरंग बहादुर सिंह जो की भदरी के राजा थे। राजा बजरंग बहादुर सिंह ने 1926 में भदरी का कार्य भार संभाला था। इनकी पत्नी का नाम रानी गिरिजा देवी था। देश की आजादी के बाद भदरी को भारत गणराज्य में विलय कर दिया गया था। बजरंग बहादुर सिंह 1 जनवरी 1955 से 13 अगस्त 1963 तक हिमाचल प्रदेश के उप-राजयपाल रहे। बजरंग बहादुर सिंह जी स्वतंत्रता सेनानी नेता भी थे। इनके कोई संतान न होने के कारण, भतीजे उदय प्रताप सिंह जी को भदरी का राजा नियुक्त किया गया था।

राजा भैया ने अपनी प्राथमिक शिक्षा नारायणी आश्रम इलाहबाद के महाप्रभु बाल विद्यालय से की। 1985 में दसवीं और 1987 में इलाहबाद से ही इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। लखनऊ विश्वविद्यालय से राजा भैया ने मिलिट्री साइंस और भारतीय मध्यकालीन इतिहास में स्नातक किया है। राजा भैया को निशानेबजी,घुड़सवारी,विमान उड़ाना,नाव चलना बहुत पसंद है। रघुराज प्रताप सिंह का विवाह बस्ती रियासत की राजकुमारी भान्वी देवी से हुआ। इनके दो पुत्र व दो पुत्रियाँ है। एक पुत्र का नाम शिवराज और दूसरे पुत्र का नाम ब्रृजराज है और एक पुत्री का नाम राधवी व दूसरी पुत्री का नाम ब्रृजेश्वरी है।

रघुराज नाम इसलिए रखा

रघुराज प्रताप सिंह के पिता उदय प्रताप सिंह और माता मंजुल राजे की संत द्योराहा बाबा में अटूट आस्था थी और संत द्योराहा बाबा ने ही राजा भैया का नाम, श्री राम के गोत्र रघुवंश के आधार पर रघुराज प्रताप सिंह रखा था। बाद में ये राजा भैया के नाम से देश विदेश में प्रसिद्ध हुए। राजा भैया के पिता उदय प्रताप सिंह विश्व हिन्दू परिषद् और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मानद पादाधिकारी भी रह चुके है। बता दें राजा भैया अपने परिवार के पहले सदस्य थे जिन्होंने राजनीति में अपना कदम रखा और अंगद की तरह अपने पैरो को कुछ इस तरह कुंडा की राजनीति में जमा दिया की कोई राजा भईया को 1993 से अभी तक हरा नहीं पाया। निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले राजा भैया ने राजनीति में अपने 25 साल पूरे होने पर खुद की पार्टी बनाने का एलान किया और पार्टी का नाम जन सत्ता रखा।

बीजेपी व सपा दोनों की सरकार में मंत्री रहे

1993 में कुंडा सीट से राजा भैया ने स्वतंत्रता पूर्वक राज्य स्तरीय चुनाव में भाग लिया और पहली बार राजनिति में उतरे राजा भईया विजयी होकर विधायक बने। राजा भैया ने 1993 व 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को समर्थन दिया और 2002, 2007, 2012, के चुनावों में समाजवादी पार्टी को अपना समर्थन दिया। 1997 में बीजेपी की सरकार और 2004 में समाजवादी की सरकार में राजा भैया मंत्री रहे है। 2012 में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया यूपी सरकार के कैबिनेट में कारागार एवं खाद्य एवं रसद मंत्री बने। 2013 में कुंडा में तिहरे हत्याकांड मामले में राजा भैया का नाम आया। जिसके 2 दिन बाद 4 मार्च 2013 को राजा भैया ने स्वयं मंत्री पद से इस्तीफा दिया। सीबीआई ने मामले की जाँच की और राजा भईया को निर्दोष पाया गया व राजा भैया को क्लीन चिट मिल गई। जिसके बाद 11 अक्टूबर को सम्मान के साथ राजा भैया को यूपी सरकार ने कैबिनेट मंत्री का पद दिया।