सांसद ने गांव को गोद लेने के बाद टी बी के पांच बच्चों को लिया गोद

पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काकोरी में भाग लेते हुए मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर। इस मौके पर सांसद कौशल किशोर ने टी बी के 5 मरीजो को लिया गोद। कुल 13 लोगो को लिया गया गोद। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने छय रोग क्या है और इसके उपाय के बारे में बताया।

कौशल किशोर जी ने बताया की क्षय रोग (टीबी) नियंत्रण गतिविधियों को देश में लागू किए पचास वर्षों से अधिक हो गये है। राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम (एनटीपी) की शुरूआत भारत सरकार ने वर्ष 1962 में बीसीजी टीकाकरण और टीबी उपचार से जुड़े जिला टीबी केंद्र मॉडल के रूप में की थी। वर्ष 1978 में बीसीजी टीकाकरण को टीकाकरण विस्तारित कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानांतरित कर दिया गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और भारत सरकार तथा स्वीडिश अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी (एसआईडीए) ने वर्ष 1992 में एनटीपी की संयुक्त समीक्षा की थी तथा उन्हें कार्यक्रम में कुछ कमियां जैसे कि प्रबंधकीय कमजोरियां, अपर्याप्त वित्त पोषण, एक्स-रे पर अत्यधिक निर्भरता, गैर-मानक उपचार कोर्स, उपचार पूर्ण होने की दर में कमी एवं उपचार परिणामों पर सुव्यवस्थित/पद्धतिबद्ध सूचनाओं का अभाव पाया गया था।

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पोषण के लिए मिलता है पैसा

एक्टिव केस फाइंडिंग के तहत जो टीबी मरीज चिह्नित किए जाते हैं, उन्हें सबसे पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाता है। वहां मेडिकल आफिसर ट्रीटमेंट काउंसलर के निर्देशन व ट्रीटमेंट सपोर्टर की देखरेख में इलाज किया जाता है। क्रिटिकल मामलों में उच्च चिकित्सा केंद्र पर मरीज को भेज कर उसका पूरी तरह से निशुल्क इलाज होता है। पुनरीक्षित क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत ऐसे मरीजों को इलाज के दौरान पोषण हेतु खाते में 500 रूपये प्रतिमाह भेजे जाते हैं।

टीबी यानी क्षय रोग को जानिए


⇏ प्रत्येक 10 में से 7 व्यक्ति इसके बैक्टेरिया से प्रभावित है। प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने पर इन 7 में से कोई व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है।

⇏ बच्चों में टीबी की रोकथाम के लिये उनके पैदा होने के बाद अतिशीघ्र बीसीजी का टीका लगवाना आवश्यक है।

⇏ टीबी का एक मरीज 10-15 लोगों को इसका बैक्टेरिया बांट सकता है।

⇏ यह बीमारी टीबी मरीज के साथ बैठने से नहीं होती बल्कि उसके खांसी, छींक, खून व बलगम के संक्रमण से होती है।

⇏ मुंह पर रूमाल रख कर, बलगम को राख या मिट्टी से डिस्पोज करके व सही समय पर टीबी की जांच व इलाज से हम इसे मात दे सकते हैं।