मुरादाबाद: स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से अवैध अस्पतालों का धंधा जोरों पर चल रहा?

Illegal Hospital

उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद में स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन की मिली भगत के कारण फर्जी अस्पतालो का धंधा जमकर फल फूल रहा है। जिससे मुरादाबाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अंजान बना हुआ है। मुरादाबाद जनपद में लगभग 250 हॉस्पिटल ऐसे हैं जिनका कही भी कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। जिनको एसीएमओ डॉक्टर डीके प्रेमी व सी एम ओ एम सी गर्ग का संरक्षण मिला हुआ है। जिस को लेकर भाजपा नगर विधायक रितेश गुप्ता ने भी शासन में बैठे कई बड़े मंत्रियों को पत्र लिखा है।

जिसमे उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित योगी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री व प्रमुख सचिव सहित शासन से एसीएमओ व सीएमओ के विरुद्ध कार्यवाही करने की मांग की है। आपको बता दें पिछले 15 वर्षों से मुरादाबाद जनपद में तैनात एसीएमओ डॉक्टर डीके प्रेमी का नेटवर्क बहुत ही मजबूत है। जिसका लाभ उठाते हुए डीके प्रेमी इन सभी को संरक्षण देने में सक्षम है। ऐसे लापरवाह अधिकारी व अस्पतालों पर उत्तर प्रदेश शासन व मुरादाबाद जिला प्रशासन को सख्त रुख अपनाते हुए जाँच करनी चाहिए।

अस्पतालो में कोई डिग्री होल्डर डॉक्टर नही

इन अस्पतालो में कोई डिग्री होल्डर डॉक्टर भी नही बैठता है और ये ऑपरेशन भी धड़ल्ले से कर रहे हैं पर शासन और प्रशासन की आँखों में धूल झोंकने के लिए इन अस्पतालों के बाहर लगे बोर्डो पर तो बड़े-बड़े डिग्री होल्डर के नाम लिखें हुए दिखाई देंगे। अगर इन अस्पतालों की जांच की जाए तो सारे फर्जी मिलेंगे। लेकिन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन लापरवाही की मिली भगत जनता की सेहत के साथ जमकर खिलवाड़ किया जा रहा है और मुरादाबाद स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन इस सब से अंजान बना हुआ है।

शायद यही वजह है कि यह अस्पताल खूब फल-फूल रहे हैं अगर कोई मरीज इन हॉस्पिटलों में मर जाता है तो स्वास्थ्य विभाग की मिली भगत होने से इन लोगों का कोई कुछ नहीं कर पाता। यही वजह है कि इन लोगों के हौसले इतने बुलंद है कि भोली-भाली जनता का खुलेआम शोषण करते जा रहे हैं। इन लोगों में शासन व स्वास्थ्य विभाग का कोई खौफ नहीं होता। क्योंकि यह लोग पैसे के बल पर अपने हॉस्पिटल चला रहे है और यही कारण है कि भोली-भाली जनता का शोषण होता जा रहा है।

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कुछ अस्पताल ऐसे भी आपको देखने के लिए मिल जाएंगे जैसे कि बूचड़खाने होते हैं। जिनका ना ही कोई बोर्ड है ना ही कोई साफ सफाई है।असल में देखा जाए तो यह सब स्वास्थ्य विभाग के मानकों की धज्जियां उड़ाते दिख रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग आँखों पर पट्टी बांध कर बैठा है। इससे पता चलता है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत है। अगर सीएमओ साहब से इस संबंध में बात की जाए तो वह बात को टाल मटोल कर देते हैं और बयान देने से भी इनकार कर देते हैं। आखिर कब तक ऐसा होता रहेगा। जनता का स्वास्थ सेवाओं के नाम पर शोषण अगर इसी प्रकार होता रहा और स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो मुरादाबाद की स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी।

रिपोर्टर- नसीर खान

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