लखनऊ विश्वविद्यालय का आज से शुरू हुआ 100 वां साल

google

लखनऊ का सबसे प्रसिद्ध तथा लखनऊ का गौरव माना जाने वाला लखनऊ विश्वविद्यालय ने आज दिनांक 25 नवम्बर ( सोमवार ) 2019 को अपने स्थापना के 99 साल पूरा करके 100 वें साल में प्रवेश कर लिया है। लखनऊ विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 25 नवम्बर 1920 को इसके अधिनियम पर हस्ताक्षर हुए थे। बता दें लखनऊ विश्वविद्यालय देश का एक ऐसा विश्वविद्यालय है जिसने अपनी शुरुआत करने वालों का ही दुश्मन बन गया। लखनऊ विश्वविद्यालय की शुरुआत एक अंग्रेज गवर्नर ने किया था, जिसका परिणाम यह हुआ की आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ बगावत लखनऊ विश्वविद्यालय से ही शुरू हुई।

318 एकड़ में फैला है लखनऊ विश्वविद्यालय

लखनऊ विश्वविद्यालय कुल 318 एकड़ में फैला हुआ है, लखनऊ विश्वविद्यालय के दो परिसर हैं जो की लखनऊ में ही दोनों परिसर हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में कुल 44 विभाग, 8 संकाय, 10 संस्थान, 5 शोधपीठ हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में 20882 विद्यार्थी, 232 विदेशी विद्यार्थी पढ़तें हैं।

निःशुल्क बने IAS/PCS अधिकारी: UPSC कोचिंग

क्यों प्रसिद्ध है लखनऊ विश्वविद्यालय का टैगोर पुस्तकालय

आपको बता दें की लखनऊ विश्वविद्यालय में दो पुस्तकालय है एक रवींद्र नाथ टैगोर को समर्पित टैगोर पुस्तकालय और दूसरा कोआपरेटिव लेंडिंग पुस्तकालय। लखनऊ विश्वविद्यालय का टैगोर पुस्तकालय इस समय देश के प्रतिष्ठित पुस्तकालयों में गिना जाता है। टैगोर पुस्तकालय में लगभग पांच लाख किताबे हैं। टैगोर पुस्तकालय का नक्सा मशहूर आर्किटेक्ट ग्रिफिन ने तैयार किया लेकिन वह इसको पूरा नहीं कर पाए थे उनकी मृत्यु हो गई थी। ग्रिफिन के मृत्यु के बाद नर्लीकर ने नक्सा पूरा किया था। लखनऊ विश्वविद्यालय के स्थापना के बाद रवींद्र नाथ टैगोर कई बार यहाँ आये। टैगोर की मृत्यु के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय की केंद्रीय पुस्तकालय को टैगोर पुस्तकालय का नाम दिया गया।

लखनऊ विश्वविद्यालय कर रहा है चुनौतियों का सामना

लखनऊ विश्वविद्यालय को डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने स्कोप्स पब्लिकेशन इंडेक्ट्स के आधार पर शीर्ष 25 विश्वविद्यालयों में शामिल किया है, राज्य विश्वविद्यालयों में लखनऊ विश्वविद्यालय सबसे आगे है। इसके बावजूद भी इस समय सरकार से अनुदान फ्रीज होने के बाद सिर्फ 34 करोड़ रुपये का ही अनुदान मिलता है। अगर हम बात करें खर्चे की तो लखनऊ विश्वविद्यालय में केवल वेतन पर ही हर साल 180 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यही कारण है की लखनऊ विश्वविद्यालय आर्थिक संकटों से घिरा हुआ है।