जाने क्यों विलुप्त हो रही है भारतीय संस्कृति

भारत पूरे विश्व में अपनी कला और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। जो कलाएं और संस्कृति भारत देश में हैं वो विश्व के किसी भी दूसरे देश में नहीं हैं। भारत की कला और संस्कृति को देखने के लिए देश-विदेश के लोग आते हैं। भारत में लगभग सभी धर्मों के लोग रहते हैं और सभी धर्मों की अपनी-अपनी संस्कृति है। भारत में संगीत, नाट्य,नृत्य, रंगमंच,प्राकृतिक कला,चित्र,मूर्तियां,मेले और त्यौहार, धर्मिक पूजा,अभिवादन के तरीके,कपडे का पहनाव,गहनों का पहनना आदि जैसी संस्कृति बहुत प्रसिद्ध है। लेकिन अगर हम बात करें वर्तमान समय की तो ये सारी कलाएं बहुत ही कम देखने को मिलती हैं,कुछ तो बिलकुल विलुप्त ही हो गई हैं।

विलुप्त होती ये कलाएं

नाट्य कला- भारत में नाट्य कला का बहुत महत्व है,एक समय था जब देश के कोने-कोने में नाट्य कलाएं होती थी। दूर-दूर से लोग देखने के लिए आते थे,नाट्य एक दिन नहीं यह महीनों तक चलता था। लोग खूब मनोरंजन करते थे,लेकिन वर्तमान समय में नाट्य कला का बोल बाला ख़त्म हो गया है। लोग नाट्य देखने के लिए तरसते हैं आज नाट्य देश से विलुप्त हो गया है।

संगीत कला- भारत जैसी सुरीली और मधुर संगीत कला किसी अन्य देश में नहीं है इसलिए भारतीय संगीत को विदेशों में पसंद किया जाता है। लेकिन पहले की संगीत कला और वर्तमान की संगीत कला में कोई तालमेल ही नहीं है। पहले के संगीत बहुत ही मधुर और प्रेणादायक होती थे लेकिन आज के संगीत में कोई मधुरता ही नहीं रह गई है। आज की हमारी संगीत कला दुसरे देशों से भी करब हो गई है ऐसी संगीत कला से लोगों की रूचि कम हो रही है।

नृत्य कला- पहले भारत में नृत्य कलाएं बहुत प्रसिद्ध थी,हर क्षेत्र के अपनी अलग-अलग नृत्य होती थी जैसे- कत्थक नृत्य,मणिपुरी नृत्य,राजस्थानी नृत्य,पूर्वी-पश्चिमी नृत्य आदि नृत्य कलाएं थी। लेकिन वर्तमान में ये सारी कलाएं विलुप्त होती जा रही है और लोगो की रूचि कम हो रही है।

मूर्ति कला- भारत में पहले मूर्ति कला का बहुत ज्यादा बोलबाला था। इससे कलाकारों का जीवन यापन भी होता था और भारत पूरे विश्व में इस कला के लिए जाना जाता था। पहले कलाकार ऐसी-ऐसी आकृतियों की इमारते बनाते थे की उनको घंटों देखने पर भी मन नहीं भरता था। लेकिन आज ये सारी कलाएं विलुप्त हो गई है कहीं भी देखने को नहीं मिलती हैं।

मेले और त्योहार- भारत में पहले एक जमाना था जब कोई मेला या त्योहार आने के कई दिनों पहले से लोगो में खुशियों का ठिकाना नहीं रहता था,लोग बहुत ही उत्सुक रहते थे त्योहारों की तो महीना भर पहले से तैयारी सुरु कर देते थे। लेकिन वर्तमान समय में इनका कोई महत्व ही नहीं रह गया है। यहाँ तक की मेला कब आता है और कब चला जाता है पता ही नहीं चलता है।

अभिवादन के तरीके- भारत में पहले के लोग अभिवादन करते थे तो हाँथ जोड़कर,पैर छूकर और गले मिलकर इससे जो अभिवादन करता है और जिसको अभिवादन करता है दोनों को ख़ुशी होती है और अपनेपन का एहसास होता है। लेकिन आज तो हाय,हेलो,टाटा, बाय-बाय का जमाना चल गया है जिसमे छोटे और बड़े का कोई फर्क ही नहीं है। इस तरह से अभिवादन के तरीके भी बदल गए हैं।

इस तरह से वर्तमान समय में भारत की पुरानी और मर्यादाओं वाली संस्कृति विलुप्त होती जा रही है और नई संस्कृति नए तरीके से जन्म ले रही है जिसमे मर्यादा की कमी है और कई जगहों पर तो इससे लोगों का अपमान भी होता है। लोगों के साथ-साथ धार्मिक अपमान भी होता है।