जानिए किस मंदिर की तर्ज पर होगा राम मन्दिर का निर्माण

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सुप्रीम कोर्ट ने कल बीते हुए दिन शनिवार को अयोध्या मामले का फैसला 40 दिन लगातार चली लम्बी सुनवाई के बाद दे दिया है। ये फैसला सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू और मुस्लिम दोनों पक्षों का ध्यान रखते हुए दिया है। कोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन राम लला को दी है और 5 एकड़ जमीन अयोध्या में अयोध्या में ही पर मुस्लिम पक्ष को देने का फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को दोनों पक्षों ने स्वीकार किया। फैसला आने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी दित्यानाथ ने देश वासियों से शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखने की अपील की है।

इस मंदिर की तर्ज पर बने गए अयोध्या मंदिर

बता दे की अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया है। अयोध्या मंदिर के निर्माण की खास बात यह है की अयोध्या में मंदिर का निर्माण गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर होगा।

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है सोमनाथ मंदिर

आपको बात दें की सोमनाथ मंदिर गुजरात प्रांत के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे स्थापित है। यह मंदिर विश्वप्रसिद्ध मंदिर है जो की 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। सोमनाथ मंदिर की पावन प्रभास क्षेत्र में स्थित इस सोमनाथ-ज्योतिर्लिंग की महिमा महाभारत, श्रीमद्भागवत तथा स्कंद पुराणादि में विस्तार से बताई गई है। बता दे की चन्द्रदेव का एक नाम सोम भी है। उन्होंने भगवान शिव को ही अपना नाथ-स्वामी मानकर यहां तपस्या की थी इसीलिए इस मंदिर का नाम ‘सोमनाथ’ हो गया।

जानिए कितनी बार हुआ सोमनाथ मंदिर का निर्माण

बता दे की अरब यात्री अल बरूनी ने अपने यात्रा वृतान्त में इसका विवरण लिखा। इससे प्रभावित हो महमूद गजनवी ने 1025 में सोमनाथ मंदिर पर हमला कर उसकी सम्पत्ति लूट मंदिर को नष्ट कर दिया था। इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया। 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर कब्जा कर फिर से इस मंदिर को गिरा दिया गया। इस तरह सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और विनाश का सिलसिला जारी रहा। फिर भारत की आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने समुद्र का जल लेकर नए मंदिर के निर्माण करवाने का संकल्प लिया।

उनके इस संकल्प के बाद 1950 में मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ।आपको बता दें की 6 बार टूटने के बाद 7वीं बार इस मंदिर को कैलाश महामेरू प्रासाद शैली में बनाया गया। इसके निर्माण कार्य से सरदार वल्लभभाई पटेल भी जुड़े रह चुके हैं। इस समय जो मंदिर खड़ा है उसे भारत के पूर्व गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने की देन है।सोमनाथ मंदिर के निर्माण कार्य के बाद 1 दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने सोमनाथ मंदिर राष्ट्र को समर्पित किया।