सरकार इस तरह बंद करती है आपका इंटरनेट

internet ban

आज के समय में INTERNET बहुत महत्वपूर्ण है। इसी के माध्यम से हम देश दुनिया से जुड़ पाते है और जानकारी प्राप्त करते है। लेकिन कुछ लोग इसका गलत उपयोग करते है और अफवाह, भ्रम आदि फैलानी की कोशिश करते है। सबसे ज्यादा गलत जानकारी या खबर फेसबुक और व्हाट्सएप्प के जरिये फैलाई जाती है। क्योंकि इनका उपयोग करने वाले लोग लाखो करोड़ो में है।

इसलिए किसी भी जानकारी को आसानी से इन तक पहुंचाया जा सकता है। अब जो जानकारी उनको दी जा रही है वो सही है या गलत लोग बिना उसकी जाँच किये विश्वास कर लेते है और गलतफैमी का शिकार हो जाते है और यह सभी संभव हो पाता है INTERNET की वजह से,इसलिए जब कभी भी किसी शहर, राज्य या देश में अशांति फैलती है या फैलाये जाने की संभावना होती है तो सरकार सबसे पहले इंटेरनेट सेवा को बंद कर देती है। जिससे लोगों तक गलत खबर न पहुंचे और वो इसपर प्रतिक्रिय न दें पाए। सरकार कैसे बंद करती है इंटरनेट?

Internet को बंद करने की प्रक्रिया

INTERNET को बंद करने का आदेश home Secretary देते है। आदेश मिलने के बाद एसपी या उच्च अधिकारी टेलीकॉम कंपनी (Idea, Airtel, Vodafone, Jio) को राज्य में सूचित किया जाता है। इस ऑडर को अगले वर्किंग डे को केंद्र या राज्य सरकार के रिव्यू पैनल के पास Intrnet बंद करने के लिए भेजा जाता है। 5 दिनों तक इसका रिव्यू किया जाता है। इस रिव्यू पैनल में टेलीकम्युनिकेशन्स सेक्रेटरी,कैबिनेट सेक्रेटरी,लॉ सेक्रेटरी होते है। मंजूरी मिलने के बाद इंटरनेट को बंद कर दिया जाता है।

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पहले धारा 144 लगने पर Net को ज्यादातर बंद कर दिया जाता था पर 2017 में सरकार पब्लिक इमरजेंसी या पब्लिक सेफ्टी एक्ट लेकर आयी, जिसमे राज्य के गृहमंत्रालय बंद करने का आदेश दे सकते है। मालूम हो इससे पहले डीएम या एसडीएम आदेश देते थे।

इंटरनेट बंद करने से नुकसान

जब कभी भी इंटरनेट को बंद कर दिया जाता है तो उससे आम आदमी से लेकर बिजनेसमैन,सरकार आदि सभी प्रभावित होते है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2011 से 2017 तक 16000 घंटो के लिए इंटरनेट बंद किया गया। जिसकी वजह से 213.35 अरब का नुकसान हुआ। सात साल में लगभग 240 बार देश में इंटरनेट बंद हुआ। उत्तर प्रदेश में पिछले नौ सालो में 24 बार नेट बंद रहा।