अकीदतमंदों की हर दुआ कुबूल होती हैं मौला अली के दरबार में

    चार सौ साल से भी ज्यादा पुरानी ग्राम जोगीरम्पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध दरगाह-ए-आलिया नज्फे हिंद शिया हज़रात की विश्व प्रसिद्ध दरगाह है। मान्यता हैं की यहां सैयद राजू की मदद को खुद मौला अली आए थे। इस दर पर आकर हर दुख-दर्द, बीमारी, परेशानियाँ और घरेलू परेशानिया दूर हो जाती है। इस दर पर मजहबी दीवारें कोई मायने नहीं रखती हैं। यहाँ हर धर्म और वर्ग के लोग एक ही भावना से इबादत करते है तथा सुख-शांति एवं अमन की दुआ करते है।

    सैयद राजू ने ख्वाब में निशाने सिम देखे और उसकी जगह छोटी दरगाह तामीर करा दी थी। दरगाह की तामीर को पानी नहीं मिला, तो उन्हें दोबारा से ख्वाब में गूलर के पेड़ के नीचे पानी का चश्मा दिखाई दिया। खुदाई के बाद पानी का चश्मा फूट पड़ा था। इसके बाद से लगातार देश-विदेश से लाखों की संख्या में जायरीन दरगाह पर मौला अली के दरबार में पहुंचते है और खिराजे-अकीदत पेश करने के साथ-साथ चादर एव शीरनी चढ़ाकर मन्नते मांगते हैं।

    नजीबाबाद से करीब दस कि.मी. दूर रायपुर मार्ग पर ग्राम जोगीरम्पुरी में विश्व प्रसिद्ध दरगाहे आलिया नज्फे हिंद न सिर्फ देश के बल्कि विदेशियों के लिए आस्था का केंद्र है। दरगाह पर हर साल मई के महीने में सालाना मजलिसे शुरू होंती हैं। इतिहासकार और बुजुर्ग बताते है कि सैय्यद राजू अपनी बहादुरी की वजह से अपने वालिद सैयद अलाउद्दीन की मौत के बाद बादशाह-ए-वक्त शाहजहां के मुशीरे खास हो गये। बादशाह ने हैदराबाद में हुई बगावत को दबाने के लिये सैय्यद राजू को भेजा था।

    मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहां को कैद करने के बाद सैय्यद राजू का कत्ल करने का इरादा कर लिया था। यह पता चलने पर सैय्यद राजू फौज लेकर जोगीरम्पुरी (नजीबाबाद) में आकर गुप्त रूप से रहने लगे थे। एक बूढ़े ब्राह्मण जिसकी निगाह कमजोर थी, दोपहर के वक्त जंगल में घास खोद रहा था। अचानक उसके पास घोड़े पर सवार एक नकाबपोश पहुंचा और उससे सैय्यद राजू के बारे में मालूम किया। सैय्यद राजू को बुलाकर लाने की बात कहने पर उक्त ब्राह्मण ने खुद को अंधा भी बताया। तब नकाबपोश ने ब्राह्मण को आंखों पर हाथ रखकर हटाने को कहा। ऐसा करते ही उक्त ब्राह्मण के आंखों की रोशनी लौट आयी। ब्राह्मण ने देखा कि घोड़े पर हरे लबादे में मौला अली खड़े थे। ब्राह्मण ने सैय्यद राजू के पास पहुंचकर सारा किस्सा बयान किया। ये सुनते ही सैय्यद राजू खुद जंगल की ओर भागे। जब वो उस मुकाम पर पहुंचे, तो वहां उन्हें सिवाये निशाने सिम (हजरत अली के घोड़े के पैरों के निशान) के कुछ नजर नहीं आया।

    चश्मे के पानी से दूर होती हैं बीमारियां

    जोगीरम्पुरी में स्थित दरगाहे आलिया नज्फे हिंद परिसर में स्थित चश्मे के बारे में शिया हज़रात की मान्यता है कि चश्मे का पानी पीने से जहां बीमारी दूर होती है। वही यहा आने वाले शिया अकीदत मंद मानते है की यहां के पानी के नहाने से बीमारियां दूर होती है। साथ ही यहां आये सभी जायरीन इस चमत्कारी पानी को अपने साथ घर ले जाते है। वहीं सालाना मजलिसों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आकर मातम करने वाली अंजुमनों में शामिल जायरीनों के मातम के दौरान शरीर पर आने वाले जख्मों पर चश्मे का पानी दवा की तरह काम करता है।

    यू तो मई के महीने में मजलिस में पूरी दुनिया से मौला अली के चाहने वाले यहाँ आते हैं वही दरगाह में पूरे साल अकीदतमंदों का आना लगा रहता हैं।