किसान नेता टिकैत को भारत रत्न देने की हुई मांग

  • भाकियू ने चौधरी टिकैत के नेतृत्व में 70 के दशक के उत्तरार्ध और 80 के दशक में चलाए थे कई आंदोलन
  • 15 मई 2011 को 76 साल की आयु में बोन कैंसर की वजह से उनका हो गया था निधन

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर स्थित सिसौली के किसान नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का 84वें जन्म दिवस पर भारत रत्न देने की मांग की गई। कोतवाली देहात में भारतीय किसान यूनियन की ब्लाक कोतवाली टीन सेड में रविवार को एक बैठक संपन्न हुई जिसमे उन्नाव से किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अंसार सिद्दीक़ी, प्रेमनाथ और संजीव बालियान समेत कई दिग्गज मौजूद रहे। भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और किसानों ने यज्ञ कर एक दूसरे को मिठाई खिलाई।

जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि बाबा टिकैत ने किसानों को हक़ दिलाया और अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाना सिखाया जिसके कारण ही आज किसानों के दिन सुधरे हैं। प्रदेश सचिव रामौतार सिंह ने कहा कि आज किसान अपने खिलाफ होने वाले अन्याय के लिए आवाज़ उठा रहा है।

भारतीय किसान यूनियन ने चौधरी टिकैत के नेतृत्व में 70 के दशक के उत्तरार्ध और 80 के दशक में कई आंदोलन चलाए थे। साल 1988 में गन्ने की बढ़ी हुई कीमतों, बिजली तथा पानी की दरों को कम करने और क़र्ज़ माफ़ी के लिए आंदोलन चलाए गए थे जिससे मेरठ थम सा गया था। उसी साल दिल्ली में किसानों की समस्या पर भारतीय किसान यूनियन वोट क्लब पर एक हफ्ते प्रदर्शन किया और किसान नेताओं की भूमिका मज़बूत कर दी।

भारतीय किसान यूनियन के टिकैत ग्रुप ने मुख्यमंत्री को सौंपा 21 सूत्रीय ज्ञापन।

किसानो तथा गावों के कल्याण के लिए चौधरी टिकैत की गहरी प्रतिबद्धता थी। पढ़े लिखे ना होने के बावजूद उनमे किसानों को लामबंद करने की अद्भुद प्रतिभा और क्षमता थी। उन्होंने कई बार सरकार को झुकाया और किसानो को उनका हक़ दिलाया। कामकाज, साहस और सादगी ने उनको एक ताकतवर नेता बनाया और सारी ज़िन्दगी वह राजनीति से लड़ते रहे।

मुज़फ्फरनगर के सिसौली में 6 अक्टूबर 1935 को एक किसान के घर में उनका जन्म हुआ था तथा आठ साल की आयु में वह बालियान खाप के चौधरी बन गए। आन्दोलनों की वजह से वह कई बार जेल भी गए लेकिन कभी कमज़ोर नहीं पड़े। 15 मई 2011 को 76 साल की आयु में उनका बोन कैंसर की वजह से देहांत हो गया था।