21वीं सदी में अंधविश्वास के शिकार बने लोग, बीमार बच्चों के साथ करते है ऐसा

रायबरेली शहर से सटे हुए परशदेपुर रोड पर गंदे नाले में आज भी ग्रामीण सूखे रोग के इलाज के लिए इस ठंडक में भी अपने मासूमों को नाहलाते हैं। लोगों को यह लगता है डॉक्टर से ज्यादा फायदेमंद नाले के गंदे पानी में बच्चों को नहलाना है। गंदे पानी में मासूमों को नहला कर उनके कपड़ों को नाले के किनारे लगे पेड़ों और झाड़ियों पर टांग देते हैं।

मासूमों को गंदे पानी में न जाने के बाद नाले से लगभग 100 मीटर दूर पेड़ के किनारे बैठे हुए एक बाबा से बच्चों की झाड़-फूंक करा कर ग्रामीण अपने घरों को जाते हैं। बाबा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह लगभग 20 साल से इसी स्थान पर बैठकर मासूमों को झाड़-फूंक से सही कर देते हैं।

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ग्रामीण क्षेत्रों से आये लोगो की माने तो बाबा द्वारा किये गए इलाज से सभी लोग ठीक हो जाते है। उस बाबा का दावा करते है कि उनका इलाज कारगर है। रविवार और मंगलवार को बाबा से फूक झाड़ करवाने के बाद लोग अपने बच्चों को नाले के पानी से नहला कर सूखा रोग से मुक्ति दिलाने का काम करते हैं। नाले के पानी से मासूमो को न सिर्फ नहलाया जाता है।

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