एक Mukhi Rudraksha से लेकर 14 मुखी (हानि-लाभ) तक पूरी जानकारी

    rudraksha

    Hindu धर्म में Rudraksa का बहुत महत्व है। ये आपको देवताओं, साधू सन्यासियों, सन्त महात्माओं के गले में और हर हिन्दू सनातनी के पूजा घर में अवश्य मिलेगा। ईश्वर की उपासना में मन्त्र जप के लिए रुद्राक्ष की माला का विशेष महत्व है। ज्योतिष में ग्रहों की शांति व दोष निवारण तथा सुख सौभाग्य के लिए इसे धारण किया जाता है।

    Rudraksa है क्या?

    धार्मिक मान्यताओं में Rudraksa को भगवान शिव का आँसू बताया गया है, जो पृथ्वी पर भारत में प्राकृतिक रूप से हिमालय से लगे क्षेत्र में पेड़ (Rudraksha Tree) पर लगे फल की गुठली के रूप में मिलता है।

    इसकी आकृति लगभग गोल और सतह ऊबड़खाबड़ सी दिखती है, पर यह अपनी कुछ विशेषताओं के कारण 14 रूपों में पाया जाता है, जिनका महत्व भी अलग-अलग बताया गया है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव की तपस्या से तप्त हुई आँखों से जल की बूँदें पृथ्वी पर गिरीं और उससे रुद्राक्ष पल्लवित हुआ। इसीलिए रुद्राक्ष को साक्षात शिव का रूप माना जाता है।

    Rudraksa के विभिन्न रूपों का प्रभाव भी अलग अलग होता है। इसके अलग अलग रूप व प्रभाव –

    एक मुखी रुद्राक्ष

    इसे भगवान शिव का रूप माना गया है। यह एक दुर्लभ रुद्राक्ष माना जाता है। ek mukhi rudraksha पहनने से शारीरिक, मानसिक कष्ट दूर होते हैं, सुख में वृद्धि होती है, सूर्य सम्बन्धी दोष दूर होते हैं, ह्रदय रोग, नेत्र दोष व पेट विकार भी दूर होते हैं।

    माना जाता है कि सिंह, मेष व कर्क राशि वालों के लिए रुद्राक्ष अधिक लाभदायक होता है।

    इसका मन्त्र है- ॐ ह्रिं नमः

    दो मुखी रुद्राक्ष

    do mukhi rudraksha को भगवान गौरी-शंकर का स्वरूप माना गया है। इसके पूजन से भगवान अर्धनारीश्वर प्रशन्न होते हैं। इसे पहनने से वैवाहिक जीवन में सुख शांति आती है।

    • जिनके विवाह में अड़चन आ रही हो उन्हें इसका पूजन कर धारण करना चाहिए।

    • इसे पहनने से ह्रदय रोग, मष्तिष्क रोग व नेत्र रोग दूर होते हैं।

    • इसके नियमित पूजन व पहनने से गौ हत्या का पाप भी मिटता है।

    • कर्क राशि वालों के लिए यह विशेष लाभकारी होता है।

    इसका मन्त्र- ॐ नमः

    तीन मुखी रुद्राक्ष

    यह अग्नि देव का प्रतीक माना जाता है। ten mukhi rudraksha पूजन व धारण करने से पापों से मुक्ति मिलती है। इसका पूजन धारण ऐश्वर्य भोग प्रदान करता है। यह नीरस जीवन में उमंग जगाता है। इससे पेट सम्बन्धी बीमारी दूर होने में सहायता मिलती है।

    इसका मन्त्र- ॐ क्लीं नमः

    चार मुखी रुद्राक्ष

    इसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का दाता माना गया है। इसे धारण करने से सन्तान की प्राप्ती होती है। इससे बोली में मिठास, दूसरों को आकर्षित करने की कला की प्राप्ती होती है।

    मान्यता है कि char mukhi rudraksha से बुद्धि तेज होती है, बड़े ग्रन्थों के अध्यन में सफलता मिलती है। इसके नियमित पूजन धारण व मन्त्र जप से जीव हत्या का दोष दूर होता है।

    इसका मन्त्र- ॐ ह्रीं नमः

    पांच मुखी रुद्राक्ष

    कहा गया है कि panch mukhi rudraksha में पंच देवों का निवास निवास होता है। यह देवगुरु ब्रह्स्पति का अधिपति है। यह भगवान शिव को सर्वाधिक प्रिय है। इसे सर्वगुण सम्पन्न व सभी सुखों को देने वाला माना जाता है। इससे गुरु के दोषों का निवारण होता है। पंच मुखी रुद्राक्ष से बुद्धी की तीव्रता बढ़ती है। उच्च रक्तचाप व मधुमेह नियंत्रण में सहयोग मिलता है। इसे सभी रुद्राक्ष में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वृश्चिक, मीन व धनु राशि वालों के लिए अधिक प्रभावशाली होता है।

    पंच मुखी रुद्राक्ष मन्त्र- ॐ ह्रिं क्लिं नमः

    छः मुखी रुद्राक्ष

    इसे भगवान कार्तिकेय का स्वरूप माना गया है। इसे पापों से मुक्ति व संतान का दाता माना गया है। cheh mukhi rudraksha पहनने से दिमाग तेज होता है और नेतृत्व की क्षमता बढ़ती है।इसके नियमित पूजन व धारण से ब्रह्म हत्या का पाप दूर होता है। जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ दूर होती हैं।इसे शुक्र का प्रधान माना गया है।

    छः मुखी रुद्राक्ष मन्त्र- ॐ ह्रिं ह्रुं नमः

    सात मुखी रुद्राक्ष

    saat mukhi rudraksha दरिद्रता को दूर करता है, इसे पहनने वाले पर लक्ष्मी की कृपा होती है।

    यह सप्त ऋषियों का नेतृत्व करता है जो सप्त धातुओं को प्रभावित करके  शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। साथ हीइसमें शनि का वास होता है। जिसके कारण इसे पहनने वाले से शनिदेव खुश रहते हैं। जोड़ों के दर्द से परेशान व मानसिक रोगी को इसे जरूर पहनना चाहिए।

    सात मुखी रुद्राक्ष मन्त्र- ॐ हुं नमः

    आठ मुखी रुद्राक्ष

    aath mukhi rudraksha के मुख्य देवता गणेश जी होते हैं। इसे भैरों बाबा का स्वरूप माना जाता है। इसे पहनने से अष्ट देवी खुश होती हैं और आशीष देती हैं। यह रुद्राक्ष पहनने वाले को आयु, यश, बुद्धि और जीवन में सकारात्मकता देता है। इसके पूजन से स्त्री भोग के पाप से मुक्ति मिलती है। किसी की कुंडली में आए राहु दोष से मुक्ति के लिए इसे धारण करना चाहिए।

    आठ मुखी रुद्राक्ष मन्त्र- ॐ हूं नमः

    नौ मुखी रुद्राक्ष

    इस रुद्राक्ष पर देवी भगवती की नौ शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। इस पर भैरव बाबा और कपिल मुनि का आशीर्वाद होता है। nau mukhi rudraksha केतु के बुरे प्रभाव को दूर करता है। मृत्यु के भय को दूर कर रक्षा कवच का काम करता है। जीवन में आने वाली प्रतिकूल परिस्थितियों को दूर कर मानसम्मान दिलाता है।

    इसका मन्त्र- ॐ ह्रिं ह्रुं नमः

    दस मुखी रुद्राक्ष

    सुंदरता व शांति देने वाले इस रुद्राक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है। इसे धारण करने से भूत प्रेत, तंत्र-मंत्र और नकारात्मक शक्तियों को असर खत्म होता है। ऊपरी बाधा से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही das mukhi rudraksha से गठिया, दमा जैसे रोगों में आराम मिलता है। समाज में प्रतिष्ठा में मिलती है व राजस्व कार्यो में सफलता मिलती है।

    दस मुखी रुद्राक्ष मन्त्र- ॐ ह्रिं नमः

    ग्यारह मुखी रुद्राक्ष

    gyarah mukhi rudraksha भगवान शिव के ग्यारह रुद्रों को प्रतीक माना जाता है। इसे पहनने वाले पर हनुमान जी की बहुत कृपा रहती है। क्योंकि हनुमान जी भगवान शंकर के ग्यारवें रुद्र हैं। इसे धारण करने से यज्ञ, हवन, धार्मिक कार्यों में सफलता मिलती है, व्यापार में उन्नति होती है। अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है। शरीर को आरोग्य देकर बलिष्ठ बनाता है।

    ग्यारह मुखी रुद्राक्ष मन्त्र- ॐ ह्रिं ह्रुं नमः

    बारह मुखी रुद्राक्ष

    barah mukhi rudraksha भी भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। इससे लक्ष्मी की प्राप्ती होती है।बड़े से बड़े रोग दूर होते हैं।गौ हत्या व रत्न चोरी का कलंक कम होता है।सभी प्रकार की दुर्घटना से बचाता है।कर्मशील और तेजस्वी बनाता है।

    बारह मुखी रुद्राक्ष मन्त्र- ॐ क्रौं क्षौं रौं नमः

    तेरह मुखी रुद्राक्ष

    शुभ लाभ प्रदाता यह रुद्राक्ष स्वर्गाधिपति इंद्र व कामदेव का स्वरूप माना जाता है। यह सभी ग्रहों के प्रभाव को अपने अनुकूल बना लेता है। इसे पहनने से सभी को अपनी तरफ साधने और वश में करने, आकर्षित करने में सफलता मिलती है। कला व अभिनय वाले लोगों को इसे धारण करने से सफलता मिलती है। जिन लोगों के जीवन में गृहस्थ जीवन में कमी और प्यार में कमी होती है उन्हें terah mukhi rudraksha पहनना चाहिए।

    तेरह मुखी रुद्राक्ष मन्त्र- ॐ ह्रिं नमः

    चौदह मुखी रुद्राक्ष

    हनुमान जी की उपासना करने वाले लोगों को इसे अवश्य पहनना चाहिए। क्योंकि यह रुद्राक्ष हनुमानजी का स्वरूप माना जाता है। इसे पहनने वाले लोग शक्तिशाली, बलवान और ऊर्जावान बनते हैं। भूत प्रेत बाधा दूर रहती है।

    • chaudah mukhi rudraksha मृत्युंजय शिव स्वरूप भी माना जाता है जो भय व अकाल मृत्यु भय से बचाता है।

    • इसका मन्त्र ॐ नमः शिवाय

    • इसके अलावा गणेश मुखी रुद्राक्ष तथा गौरी शंकर रुद्राक्ष भी होते हैं।

    • हिन्दू मान्यताओं व धार्मिक महत्व के चलते इन्हें अधिकांश हिन्दू पहनते या पूजन में रखते हैं।

    • हिन्दू समाज में इनकी माँग के चलते कुछ व्यापारी नकली रुद्राक्ष भी बेचते हैं तो इसकी पहचान होना भी जरूरी है।

    असली रुद्राक्ष की पहचान के लिए-

    बता दें जितने कम मुख का रुद्राक्ष होता है उतना ही मंहगा मिलता है। लकड़ी से बने नकली रूद्राक्ष सस्ते मिल जाते हैं और शीशम की लकड़ी से बने तो बहुत भृमित करते हैं। ऐसे में ठीक से पहचान कर इन्हें खरीदना चाहिए।

    1- पानी में 1 घण्टा उबालने पर यदि रंग नहीं उतरता तो यह असली है।

    2- असली रुद्राक्ष पानी में डूब जाता है।

    3- तांबे के 2 सिक्कों के बीच रख कर दबाने से यदि घूमने लगे तो असली है।

    4- सरसों का तेल लगा कर रगड़ने से रंग न उतरे और चमकने लगे तो असली है।

    5- सुई से कुरेदने पर रेशे निकलें तो असली होगा।

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    निष्कर्ष– इस लेख क माध्यम से हमने 1 से लेके 14 मुखी रुद्राक्ष के बारे में जाना और उनकी क्या उपयोगिता है इसे भी समझा। उम्मीद है आपको यह लेख पसंद आया होगा और रुद्राक्ष से जुड़े सारी जानकारी प्राप्त हुई होगी।

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