भड़काऊ भाषण देने के मामले में आजम खां को मिली राहत

सपा के नेता आजम खां जमीन कब्जा करने के साथ ही भड़काऊ भाषण देने के आरोप में फंसे थे। इस मामले में सपा सांसद आजम खां को सेशन कोर्ट से राहत मिल गई है। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। कोर्ट ने रामपुर के अजीमनगर थाने में किसानों की ओर से दर्ज एफआईआर में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।राज्य सरकार व अन्य विपक्षियों से भी जवाब मांगा है। अब याचिका की सुनवाई 24 अक्टूबर को की जाएगी।

बता दें की इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्र और जस्टिस मंजू रानी चौहान की डिविजन बेंच ने आजम की याचिका पर सुनवाई की और उनके खिलाफ दर्ज 29 मामलों पर रोक लगा दी। बताया जा रहा है कि इस आधार पर अब आजम को दूसरे मुकदमों में भी राहत मिल सकती है। इससे पहले मंगलवार को रामपुर स्थित आजम खान के आवास के मुख्य द्वार पर उनके खिलाफ जमीन हड़पने समेत तमाम केसों से जुड़े कोर्ट के नोटिस चिपकाए गए थे।

सूत्रों के मुताबिक आजम खां सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। उनके खिलाफ कांग्रेस के पूर्व नेता फैसल लाला ने शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें आरोप था कि 29 मार्च को सपा कार्यालय पर आजम खां ने जनसभा की थी, जिसमें लोगों को जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी और नगर मजिस्ट्रेट के खिलाफ भड़काया था। कहा था कि ये अधिकारी शहर का माहौल खराब करने के लिए भेजे गए हैं। इसके साथ ये भी कहा की वे रामपुर को खून से नहलाना चाहते हैं। शहर कोतवाली पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया था। मुकदमे में गिरफ्तारी से बचने के लिए सांसद ने जिला जज के न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्र और जस्टिस मंजू रानी चौहान की डिविजन बेंच ने आजम की याचिका पर सुनवाई की और उनके खिलाफ दर्ज 29 मामलों पर रोक लगा दी। बताया जा रहा है कि इस आधार पर अब आजम को दूसरे मुकदमों में भी राहत मिल सकती है। इससे पहले मंगलवार को रामपुर स्थित आजम खान के आवास के मुख्य द्वार पर उनके खिलाफ जमीन हड़पने समेत तमाम केसों से जुड़े कोर्ट के नोटिस चिपकाए गए थे। अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका पर आपत्ति जताई, जबकि बचाव पक्ष ने अधिवक्ता नासिर सुल्तान का कहना था कि मुकदमा राजनीति से प्रेरित है। यदि आचार संहिता के उल्लंघन का मामला था। तो फिर इसे सरकार की ओर से दर्ज किया जाना चाहिए था। मुकदमा दो वर्गों के बीच तनाव फैलाने की धारा में किया है, जबकि बयान में ऐसी कोई बात नहीं है। अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने इस मामले में सांसद की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है।