क्या इंटरनेट से लोग बन रहे हैं मानसिक गुलाम ?

मेमोरी यह एक अंग्रेजी का शब्द है इसकी उतपत्ति हुई है लैटिन शब्द memor से जिसका शाब्दिक अर्थ होता है, mindful या remembering हिंदी में इसका अर्थ होगा स्मृति, यादाश्त , याद या स्मरणशक्ति।

कालान्तर यह शब्द और विक्सित होकर memoria बना इसके बाद प्राचीन फ्रेंच भाषा में इसे memorie के नाम से अपने शब्दकोश में शामिल किया गया। 15वीं शताब्दी के आसपास इस शब्द को अंग्रेजी भाषा में introduce किया गया। memorie के आखिरी से ie हटाकर इसमें y जोड़ दिया गया। इसका अर्थ अभी भी सेम था। ये सब तो ठीक है लेकिन हम आपको मेमोरी शब्द का इतिहास क्यों बता रहे हैं।

दरअसल एक व्यक्ति की पहचान उसकी मेमोरी से है न की उसके धन, दौलत, ज्ञान, मान और प्रतिष्ठा से। कैसे ?

आपने ऐसी बहुत सी पुरानी हिंदी फिल्में देखी होंगी जिसमे किसी character की याददाश्त चली जाती है। याददाश्त यानी की मेमोरी। याददाश्त जाने के बाद वह character किसी को पहचान नहीं पाता यहाँ तक कि खुद को भी नहीं पहचान पाता। यह ठीक उसी तरीके से है जैसे किसी मोबाइल फ़ोन को फॉर्मेट कर दिया जाए। फॉर्मेट करने के बाद मोबाइल का सारा डाटा डिलीट हो जाता है जो उस मोबाइल की इंटरनल मेमोरी में पहले से स्टोर रहता है।

जिस तरह हम मोबाइल या कंप्यूटर में डेटा डाउनलोड कर उसे फ़ोन या कंप्यूटर की मेमोरी में सेव करते हैं। ठीक उसी तरह आदमी अर्थात हम जो भी कुछ देखते,सुनते,खाते,पहनते,पढ़ते,लिखते हैं वो सब हमारे दिमाग़ की मेमोरी में स्टोर होता रहता है।

एक व्यक्ति सिर्फ़ उन्हीं प्रश्नों के जवाब दे सकता है जिसके बारे में उसने कभी पढ़ा,सुना या देखा होगा।

उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति आप से नाम पूंछता है तो आप तुरंत उसको अपना नाम बता देंगे क्यूँकि आपका नाम आपको याद है ,आपकी मेमोरी में दर्ज़ है आप बार बार अपना नाम लिखते बोलते व अपने आस पास वालों से सुनते रहते हैं यही कारण है कि आपको अपना नाम कंठस्त हो गया है , किन्तु यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आपसे उसका नाम पूंछे तो पहले तो आप को गुस्सा आएगा कि भाई आपको उसका नाम कैसे पता होगा ? क्यूँकि आप ने उस व्यक्ति को पहले कभी देखा सुना नहीं है नहीं उसके बारे में कुछ पढ़ा है। हालाँकि कि उसका नाम भी a से z के बीच ही होगा, लेकिन आप की मेमोरी में वह नाम दर्ज़ नहीं है। हो सकता है वह शब्द आपकी मेमोरी में हो लेकिन वो चेहरा आपके लिए नया है । ऐसे बहुत से शब्द ऐसे बहुत से चहरे आपकी मेमोरी में दर्ज़ हैं।

सुबह सोकर उठने के बाद से शाम को सोने से पहले तक हम जो कुछ भी देखते,सुनते व करते हैं, वह हमारी मेमोरी में conciously, subconsiouly या unconciously रिकॉर्ड होता है।

मानव दिमाग़ तीन अवस्थाओं में काम करता है।

1. Consious Mind ( चेतन अवस्था ) 2. Subconcious Mind ( अर्धचेतन अवस्था ) 3. Unconcious Mind ( अचेतन अवस्था )

1. Consious Mind ( चेतन अवस्था ) जो कुछ है हमारे सामने प्रत्यक्ष रूप से घट रहा है और हमे दिखाई व सुनाई दे रहा है और हम उसके प्रति physically और sensibly respond कर रहे हैं यह दिमाग की चेतन अवस्था है।

2. Subconcious Mind ( अर्धचेतन अवस्था ) जब हम कोई गीत सुनते हैं, किताब पढ़ते हैं, किसी से बात करते हैं, या कुछ याद करने की कोशिश करते हैं यह दिमाग की अर्धचेतन अवस्था है।

3. Unconcious Mind ( अचेतन अवस्था ) नींद में या बेहोशी की हालत में इंसान का दिमाग अचेतन अवस्था में होता है।

हमारे आस पास जो कुछ घटता हम उन घटनाओं से सकारात्मक या नकारात्मक रूप से प्रभावित होते हैं और वो सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव हमारे जेहन में दर्ज़ होता जाता है। हम चाहकर भी इसे अपनी मेमोरी में चढ़ने से रोक नहीं सकते।

यदि हमारे आसपास या पड़ोस में कोई ऐसा गाना बज रहा है जो हमें नहीं पसंद है। फिर भी न चाहते हुए रोज़ वही गाना सुनना पड़ता है। तो एक समय के बाद उस गीत के बोल न चाहते हुए भी हमारी मेमोरी और जुबान पर चढ़ जायेंगे। और कभी कभी Subconciously हम वो गाना गुगुनाने लगते हैं।

आज के इस डिजिटल युग में मोबाइल फ़ोन पर डेटा ऑन करते ही नोटिफ़िकेशन्स की बारिश होने लगती है। इंटरनेट के किसी पेज या वेबसाइट पर विजिट करते हैं आप को अनवांटेड विज्ञापन दिखने लगते ऐसे विज्ञापन जो हम नहीं देखना चाहते लेकिन देखने को मजबूर हैं। क्यूँकि हमें इंटरनेट की जरुरत है। लेकिन सवाल यह है कि जितना इंटरनेट की जरुरत हमें है क्या इंटरनेट को भी हमारी इतनी ही जरुरत है ?
जवाब है हाँ !

फिर इंटरनेट अपने users को अनवांटेड कंटेंट्स क्यों दिखाता है ? क्यूँकि इंटरनेट-बाज़ार के मालिकों को पता है कि users बिना इंटरनेट के नहीं जी सकते। लोग इंटरनेट के एडिक्ट हो चुके हैं। और जब इन इंटरनेट के मालिकों को सत्ता के ठेकेदारों का साथ मिलता है तो ये लोग अपने users के दिमाग से खेलने लगते हैं और खेलते खेलते उसे hijackकरने की कोशिश करते हैं। भारत जैसे देश में जहाँ कि 95 % परसेंट इंटरनेट users पोर्न देखते है यहाँ इंटरनेट के मालिकों के साथ मिलकर राजनेता बड़ी आसानी से लोगों के दिमाग को hijack कर लेते हैं। फिर उन्हें अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह बात ज्यादातर लोगों की समझ से परे है। और जो समझते हैं फ़ायदे में हिस्सेदार हैं।

ऐसे कई गेम इंटरनेट पर बैन किये जा चुके हैं जिनके वजह से लोगों की जाने गईं। लेकिन यह गेम पिछले सभी गेम्स से बड़ा और ख़तरनाक है। इस गेम में अनगिनत जानें जा चुकी हैं और बेहिसाब जानी बाकी हैं

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