नत्थू सिंह ने मुलायम सिंह को दिया था ये अनमोल तोहफा

mulayam singh yadav

भारतीय राजनीति में नेता जी के नाम से मशहूर साधारण किसान परिवार का एक लड़का जिसने उत्तर प्रदेश की राजनीति का हुलिया बदल कर रख दिया, जिसे उत्तर प्रदेश के किसानों का मसीहा कहा जाता है। किसानों के प्रति प्रेम और खरी राजनीति के कारण जिसे धरती पुत्र की उपाधि मिली, उसी महान राजनेता का आज जन्मदिन है।

इटावा के सैफई में 22 नवम्बर 1939 को जन्मे मुलायम सिंह यादव अपने शुरुआती दिनों में पहलवानी करते थे। कहते हैं की मैनपुरी में एक कुश्ती प्रतियोगिता में नत्थू सिंह की नजर इन पर पडी और मुलायम सिंह का राजनैतिक सफर शुरू हुआ।

जब पहली बार विधायक बने मुलायम सिंह यादव

1950 के दशक में जब डॉ लोहिया जी ने फर्रुखाबाद में नहर रेट आंदोलन शुरू किया तो नेता जी ने इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और जेल भी गए। जेल से लौटने के बाद नेता जी लोहिया जी के साथ जुड़े रहे और 1967 में लोहिया जी की पार्टी संयुक्त सोसलिस्ट पार्टी से चुनाव लड़ा और विधायक बने, लेकिन 1968 में लोहिया जी का निधन हो गया, जिसके बाद नेता जी उस दौर के सबसे बड़े किसान नेता चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांतिदल में शामिल हो गए। 1974 में भारतीय क्रांतिदल से दोबारा चुनाव लड़े और एक बार फिर विधायक बने। बाद में भारतीय क्रांतिदल और संयुक्त सोसलिस्ट पार्टी का विलय हो गया और भारतीय लोक दल के नाम से एक नई पार्टी बनी। इमरजेंसी के दौरान जब गैर कांग्रेसी नेताओं को जेल में ठूंसा जा रहा था तो नेता जी भी जेल गए।

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जब पहली बार मुख्यमंत्री बने मुलायम सिंह

1977 के दसक में जब प्रदेश में राम नरेश यादव की सरकार बनी तो नेता जी को सहकारिता एवं पशुपालन मंत्री बनाया गया। 1987 में जब में जब चौधरी चरण सिंह का निधन हो गया तो प्रदेश में राजनैतिक उठा परक का दौर शुरू हुआ। चौधरी चरण सिंह के देहांत के बाद उनका उत्तराधिकारी बनने की दावेदारी पेश की जाने लगी, चौधरी चरण सिंह के बेटे और मुलायम सिंह के बीच तना तनी जरी रही। 1980 में नेता जी भारतीय लोक दल के अध्यक्ष बने, 1982 से लेकर 1985 तक विधान परिषद् में नेता प्रतिपक्ष का पदभार संभाला। हालाँकि उतर प्रदेश में राजनैतिक उठा परक जरी रही। साल 1989 में वह राजनैतिक गठजोड़ बनाने में सफल रहे और पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

जब मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया

1990 में नेता जी चंद्रशेखर की पार्टी जनता दल समाजवादी में शामिल हुए। 1991 में हुए मध्यावती चुनाव में नेता जी हार गए और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। 1992 में चंद्रशेखर से मनमुटाव के चलते नेता जी ने एक नई पार्टी का गठन किया जिसका नाम समाजवादी पार्टी रखा। 1995 में नेता जी बहुजन समाज पार्टी से गठजोड़ करने में कामयाब हुए और दोबारा मुख्यमंत्री बने। 1996 में नेता जी ने लोकसभा चुनाव में हिस्सा लिया और मैनपुरी से लोकसभा सदस्य चुने गए। 1999 में वह संयुक्त मोर्चा की सरकार में रक्षा मंत्री बने।2003 में एक बार फिर समाजवादियों का दौर चला और एक बार फिर नेता जी मुख्यमंत्री बने,2007 तक नेता जी मुख्यमंत्री रहे। उसके बाद उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार बनी।

अपने पुत्र को उत्तराधिकारी बनाया

जब 2012 में एक बार फिर समाजवादी पार्टी सत्ता में लौटी और नेता जी ने अपने बेटे अखिलेश यादव को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और नेता जी ने सपा संरक्षक का पदभार संभाला। तभी से पार्टी को अपना मार्गदर्शन दे रहे हैं।

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