एक दशक बाद ये दो बड़ी टीम होंगी आमने सामने

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करीब एक दशक बाद पाकिस्तान में क्रिकेट श्रृंखला की शुरुआत हो रही है। लगभग दस साल पहले पाकिस्तानी सरजमीं पर श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर आतंकवादीयों ने गोलियां चलायी थी। 2009 में लाहौर में गद्दाफी स्टेडियम के बाहर श्रीलंकाई टीम की बसों के काफिले पर आतंकवादी हमले में आठ लोग मारे गए थे और सात खिलाड़ी तथा कुछ अधिकारी घायल हो गए थे। जिसके बाद विश्व के सभी देशों ने जो क्रिकेट खेलते थे, पकिस्तान में क्रिकेट खेलने से मना कर दिया था। ज़िम्बाब्वे ही एक ऐसी टीम थी जिसने उस हमले के बाद पकिस्तान में क्रिकेट खेला।

आईये जानतें है क्या हुआ था उस दिन

3 मार्च 2009 को श्रीलंकाई क्रिकेटरों को ले जा रही बस पर पाकिस्तान के लाहौर में गद्दाफी स्टेडियम के पास 12 बंदूकधारियों ने गोलीबारी की थी । श्रीलंकाई टीम पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन का खेल खेलने जा रही थी। मगर जब वे रास्ते में थे तभी उनकी बस पर आतंकवादियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी। उस हमले में अम्पायर अहसान रज़ा को दो गोलियां लगीं। श्रीलंकाई टीम के महेला जयवर्धने, कुमार संगाक्कारा को हल्की चोटें आईं तथा अजंता मेंडिस, समरवीरा और थरंगा परावितर्ना को बम फटने से निकलने वाले टुकड़ों से चोटें आईं थी ।

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आप को बता दें इससे पहले भी मई 2002 में, न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीम जिस होटल में ठहरी थी, उस होटल के बाहर बम फटा था। हमले के बाद न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान में अपनी टेस्ट श्रृंखला को बीच में ही छोड़ दिया। हालांकि,बाद में वे अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए 2003/2004 में श्रृंखला खेलने गए थे।

पिछले दस सालों में अंतरराष्ट्रीय टीमें सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान आने से कतराती रही हैं और पाकिस्तान ने अपने घरेलू मैच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में खेले हैं। इस बार श्रीलंकाई क्रिकेट टीम रावलपिंडी में पहला टेस्ट मैच खेलेगी। श्रीलंका की टीम सोमवार को इस्लामाबाद पहुंची, जहाँ पर टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया गया ।

इस श्रृंखला की सबसे ज्यादा रोमांच पैदा करने वाली बात यह है की पाकिस्तान के कोच मिस्बाह उल हक और श्रीलंका के मिकी ऑर्थर के बीच भी मुकाबला होगा। ऑर्थर अगस्त तक पाकिस्तान के कोच थे, जिन्हें हटाकर मिसबाह को जिम्मेदारी सौंपी गई।

उधर पाकिस्तान की जनता अपनी ज़मीन पर क्रिकेट देखने के लिए आतुर है। इससे पहले भी जब जिम्बॉम्बे वहां मैच खेलने गयी थी तो उस दौरान पाकिस्तानी क्राउड ने दोनों टीमों को सपोर्ट किया था। क्रिकेट के दीवाने विदेशी खिलाड़ियों का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे थे।