लूट लिया गया UPPCL के 45 हज़ार कर्मचारियों का 41 अरब रुपया

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उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के 45 हज़ार कर्मचारियों का 41 अरब रुपया दीवान हाउसिंग फाइनेंस कार्पोरेशन लिमिटेड (DHFL) बैंक में डूब गया है। पीएफ घोटाले के मामले में EOW की जांच महज़ प्रारंभिक निवेश तक सीमित हो कर रह गयी है। इन कर्मचारियों के रूपए अब वापस आने की कोई उम्मीद नहीं है। प्रदेश सरकार ने पहले कहा था कि यह हमारी जिम्मेदारी है परन्तु अब कोई भी लिखित बयान देने से मना कर दिया है।

यूपीपीसीएल के इन सभी कर्मचारियों की जीवन भर की कमाई लूट ली गई है और इनका जीवन संकट काल में फंस गया है। मौजूदा प्रदेश सरकार के समय में ही कर्मचारियों का पीएफ डीएचएफएल में निवेश किया गया था जिसकी ज़िम्मेदारी वह लेने को तैयार नहीं हैं और इधर उधर बात घुमा के मूल मुद्दे से धयान हटाने का प्रयास कर रहे हैं।

सरकार द्वारा दोनों चेयरमैन संजय अग्रवाल और अलोक कुमार तथा इनके अलावा एम दी विशाल चौहान और अपर्णा यू के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है बल्कि इन लोगों को अहम ज़िम्मेदारियाँ दे दी गई हैं। जिससे यह साफ़ लग रहा है कि सरकार घोटालेबाजों का बचाव कर रही है। हैरानी बात है कि सरकार ने 2 नवंबर को सीबीआई जाँच का आदेश दिया था लेकिन अभी तक जाँच की सिफारिश के लिए कोई भी पत्र नहीं भेजा है।

UPPCL मामले में मुख्यमंत्री ने दिया सीबीआई जाँच का आदेश

पीएफ घोटाले के मामले में EOW 17 मार्च और 24 मार्च 2017 से आगे बढ़ नहीं रही है और लोगों को गुमराह कर रही है। अगर यूपीपीसीएल के कमर्चारी आंदोलन करते हैं तो करते रहे लेकिन प्रदेश सरकार को इससे कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला है।